आधुनिक तकनीक से बढ़ा सब्जी का उत्पादन
रायपुर : उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक तकनीक अपनाकर दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड के ग्राम मड़से के प्रगतिशील कृषक शिवराम वेक ने अपनी खेती को नई दिशा दी है। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने वर्ष 2024-25 में 1000 वर्ग मीटर का शेडनेट हाउस स्थापित किया। इसमें उन्होंने बरबट्टी की उन्नत किस्मों का उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अपेक्षा से अधिक उपज मिली।
कम लागत में बेहतर उत्पादन और पानी की बचत करता है
शेड नेट हाउसएक कृषि संरचना है जिसमें जालीदार नेट का उपयोग करके एक ढाँचा बनाया जाता है, जो पौधों को तेज़ धूप, कीटों, और अत्यधिक मौसम से बचाता है, साथ ही ज़रूरी नमी, हवा और सूरज की रोशनी को अंदर आने देता है, जिससे फसलों के लिए अनुकूल सूक्ष्म वातावरण बनता है, विशेषकर फूल, सब्जियां और नर्सरी पौधों के लिए यह फायदेमंद है, इसे नेट हाउस या छाया घर भी कहते हैं और यह कम लागत में बेहतर उत्पादन और पानी की बचत करता है।
शेडनेट तकनीक का मिला बड़ा लाभ
शेडनेट निर्माण से तापमान नियंत्रित हुआ, फसल को कीटों से सुरक्षा मिली और मिट्टी में नमी भी बनी रही। ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करने से पानी की बचत हुई और पौधों को लगातार उचित नमी मिलती रही। इन नियंत्रित परिस्थितियों के कारण उत्पादन खुले खेत की तुलना में 35-40 प्रतिशत तक बढ़ गया। शेडनेट में तैयार हरी बरबट्टी स्थानीय बाजार में अच्छी कीमत पर बिकी, जिससे शिवराम वेक को नियमित नकद आय मिलने लगी।
खुले क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन
शेडनेट में सफलता मिलने के बाद शिवराम ने 0.20 हेक्टेयर खुले क्षेत्र में सेम की खेती शुरू की। गुणवत्ता वाले पौध, जैविक खाद, ट्रेलिस (मचान) विधि और मौसम अनुसार सिंचाई ने फसल को मजबूत बनाया। इसके परिणामस्वरूप सेम की फलन क्षमता बढ़ी और बाजार में अच्छी मांग मिलने से प्रति चक्र उन्हें 15,000 से 20,000 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
आधुनिक खेती से बढ़ी आय, बना प्रेरणास्रोत
नई तकनीक अपनाने की उनकी इच्छाशक्ति और मेहनत ने उनकी खेती को लाभकारी बना दिया। अब वे अपनी सब्जियों को सीधे स्थानीय हाट-बाजार और थोक विक्रेताओं तक पहुँचाते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई। शेडनेट और सब्जी उत्पादन से उनकी मासिक आय में लगभग 8-12 हजार रुपये की लगातार वृद्धि दर्ज की गई। आज शिवराम वेक गांव के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं। शासकीय योजनाओं और उद्यानिकी विभाग की तकनीकी सहायता से उन्होंने सिद्ध किया है कि आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं।
बिना मेहनत किए सुबह उठते ही होता है बदन दर्द? जानें इसके छिपे हुए कारण
बीसीसीआई का बड़ा इनाम: सूर्यकुमार की टीम को 131 करोड़, महिला और U-19 चैंपियनों को भी करोड़ों की सौगात
दबाव में और खतरनाक हो जाते हैं जसप्रीत बुमराह, सौरव गांगुली ने बताई खासियत
क्या है एस्मा कानून? जानिए कब और क्यों लागू करती हैं सरकारें
सोना-चांदी के दाम में बड़ी नरमी, चांदी में ₹1540 और सोने में ₹560 की गिरावट
सपाट शुरुआत के बाद संभला बाजार, उठापटक के बीच हरे निशान पर सेंसेक्स-निफ्टी
अमेरिका में 50 साल बाद बनेगी नई रिफाइनरी, 300 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान
प्रियंका चोपड़ा ने बेटी मालती को पब्लिक से दूर रखने की वजह बताई, बोलीं– 'अजनबी ने स्कूल से घर तक पीछा किया'
लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग तेज, 12 मार्च को विरोध मार्च का आह्वान