बड़वानी में बढ़ा बीमारियों का प्रकोप, अस्पतालों में उमड़ी मरीजों की भीड़
बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में लगातार हो रहे मौसमी बदलावों का प्रतिकूल असर अब आम जनता के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी तेज बारिश तो कभी उमस भरी चिलचिलाती धूप के कारण लोग तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वर्तमान में बड़वानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त, और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। इसके चलते स्थानीय जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। दूसरी ओर, अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और अधिक बढ़ गई है।
तीन दिनों में अस्पताल पहुंचे रिकॉर्ड मरीज
बड़वानी के मुख्य जिला अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार, बीते महज तीन दिनों के भीतर चिकित्सालय की ओपीडी में 2100 से भी अधिक बीमार लोग अपना इलाज कराने पहुंचे हैं। इनमें सबसे बड़ी तादाद उन मरीजों की है जो पेट दर्द, वायरल संक्रमण, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत से ग्रसित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही वर्षा और उसके तुरंत बाद होने वाली तेज उमस के चलते हवा में वायरल लोड बढ़ गया है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके साथ ही इस मौसम में दूषित जल और अस्वच्छ भोजन का सेवन भी लोगों को तेजी से पेट से जुड़ी बीमारियों का शिकार बना रहा है।
राजधानी भोपाल में भी बदला बीमारियों का स्वरूप
मौसमी बीमारियों का यह प्रकोप केवल बड़वानी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी इसका गंभीर असर देखने को मिल रहा है। भोपाल के विभिन्न अस्पतालों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में ओपीडी में आने वाले मरीजों में गंभीर खांसी, गले में तीव्र दर्द, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें अत्यधिक बढ़ी हैं। चिकित्सकों ने आगाह किया है कि अस्पताल पहुंच रहे कई मरीजों में इन्फ्लूएंजा, कोरोना और स्वाइन फ्लू जैसे शुरुआती लक्षण भी नजर आ रहे हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
बुजुर्गों और बच्चों पर मंडरा रहा दोहरा खतरा
इस बदलते और अनिश्चित मौसम में सबसे ज्यादा संवेदनशील वर्ग यानी बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में आ रहे हैं, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य लोगों की तुलना में कम होती है। बाल रोग विशेषज्ञों और सामान्य चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से लोगों से अपील की है कि वे इस मौसम में खान-पान और अपने आसपास की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। बाहर मिलने वाले खुले और बासी खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए और पीने के लिए केवल उबले हुए या अच्छी तरह फिल्टर किए गए पानी का ही उपयोग करना चाहिए। यदि बच्चे बारिश में भीग जाते हैं, तो उन्हें तुरंत सूखे और आरामदायक कपड़े पहनाएं तथा किसी भी तरह के बुखार या पेट दर्द की स्थिति में बिना डॉक्टरी पर्ची के खुद से कोई दवा न दें।
सतर्कता और बचाव ही सबसे बड़ा उपचार
इस गंभीर मौसमी संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद जरूरी स्वास्थ्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका नियमित पालन करना आवश्यक है। लोगों को अपने दैनिक जीवन में हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का ही इस्तेमाल करना चाहिए और बासी भोजन करने से सख्त तौबा करनी चाहिए। इसके साथ ही अपने हाथों को समय-समय पर साबुन और साफ पानी से धोना बेहद आवश्यक है ताकि हानिकारक कीटाणु शरीर के भीतर प्रवेश न कर सकें। घर के बुजुर्गों और बच्चों की सेहत पर लगातार नजर रखनी चाहिए और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए ओआरएस का घोल या घरेलू तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए। यदि उल्टी, दस्त या बुखार के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही उपचार शुरू करना चाहिए।
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