लिपुलेख विवाद फिर गरमाया, नेपाल के दावे से बढ़ा तनाव
काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की संसद को संबोधित करते हुए सीमा विवाद पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने रविवार को कहा कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल के नियंत्रण में भी कुछ भारतीय इलाके मौजूद हैं। इस साल मार्च में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद बालेन शाह पहली बार नेपाली संसद के सामने अपनी बात रख रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि सत्ता में आने के दो महीने बाद ही उन्हें इस जमीनी हकीकत के बारे में जानकारी मिली है। उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए सुझाव दिया कि भारत और नेपाल को मिलकर इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
लिपुलेख और लिम्पियाधुरा विवाद पर कूटनीतिक पहल
भारत और चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापारिक समझौते को लेकर प्रधानमंत्री शाह ने साफ किया कि इस पुराने सीमा विवाद का समाधान केवल आपसी कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने संसद को जानकारी दी कि नेपाल सरकार इस गंभीर मुद्दे पर भारत को एक राजनयिक नोट (आधिकारिक पत्र) भेज चुकी है, जिस पर भारत सरकार की तरफ से जवाब भी हासिल हो चुका है।
ब्रिटेन से भी बातचीत कर रहा है नेपाल
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि लिपुलेख का मामला आज का नहीं है, बल्कि यह ब्रिटिश भारत (अंग्रेजों के शासनकाल) के समय से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि नेपाल सरकार इस ऐतिहासिक उलझन को सुलझाने के लिए सिर्फ भारत और चीन से ही संपर्क में नहीं है, बल्कि इस मामले पर ब्रिटेन से भी बातचीत की जा रही है।
गौरतलब है कि मार्च 2026 में हुए चुनावों के बाद सत्ता में आई नई सरकार के मुखिया बालेन शाह ने विपक्षी दलों के भारी और लगातार दबाव के बाद संसद का रुख किया। विपक्ष के सांसद लंबे समय से मांग कर रहे थे कि देश के ऐसे अति-महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधानमंत्री खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें, जिसके बाद उन्होंने सांसदों के तीखे सवालों के जवाब देकर अपनी सरकार का रुख साफ किया।
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