प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों में डीन की कुर्सी खाली
नियुक्ति आदेश के बाद नहीं पहुंचे अधिकारी
भोपाल । प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद भी डीन की कुर्सी खाली रह गई। नियुक्ति आदेश के बाद गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर, नीचम, शिवपुरी और छिंदवाड़ा चिकित्सा महाविद्यालयों के नए अधिष्ठाताओं ने ज्वाइनिंग नहीं दी, जबकि नियुक्ति आदेश में 30 अप्रैल तक ज्वाइन करने को कहा गया था।
अब समय सीमा बीतने के बाद इनके नए डीन के रूप में चिकित्सा महाविद्यालयों में पहुंचने की संभावना खत्म हो गई है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की चयन समिति की अनुशंसा पर प्रदेश के 18 चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सा शिक्षकों को अधिष्ठाता के पद पर चयनित किया गया था। इनमें छिंदवाड़ा मेडिकल कालेज के लिए डॉ. अक्षय निगम, श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी के लिए डॉ. देवेंद्र कुमार शाक्य, गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर के लिए डॉ. गीता गुईन और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय नीमच के लिए डा. अरविंद घनघोरिया की नियुक्ति की गई थी। इन्हें आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिन की समयावधि में ज्वाइनिंग देनी थी। उन्होंने तय तिथि 30 अप्रैल को ज्वाइनिंग नहीं दी।

इस तरह चली थी चयन की प्रक्रिया
न्यायालय के आदेश पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक से लेकर चार अप्रैल तक भोपाल में प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेज में डीन की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार किए थे। साक्षात्कार में 18 मेडिकल कॉलेज से 89 डॉक्टर भोपाल पहुंचे थे। इसके बाद दूसरे सप्ताह में रिजल्ट जारी किया गया और 15 अप्रैल को जो लिस्ट जारी की गई थी, उसमें यह चिकित्सा शिक्षक डीन के लिए चयनित हुए थे।'

यह कारण भी रहे ज्वाइन न करने के
डीन की नियुक्ति के आदेश के बाद शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के लिए चयनित डीन डा. शाक्य ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया है। चयनित डाक्टरों ने पसंद के मेडिकल कालेज मांगे थे, जो नहीं दिए गए। ऐसे में यह लोग दूसरे मेडिकल कालेज में जाकर ज्वाइन नहीं देना चाहते। इसके साथ ही एक प्रमुख वजह स्थायी डीन के पद पर ज्वाइन न करने की बताई जा रही है, वह यह है कि स्थाई डीन की यह भर्ती नई है। इसमें चयनित हुए डॉक्टर को अपने मेडिकल कालेज से इस्तीफा देना होगा, तब कहीं जाकर वह अपनी नई पदस्थापना वाली जगह पर ज्वाइन कर पाते।
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