भोपाल । नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लडऩे वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर पार्टी से निकाल दिया है। महापौर व पार्षद प्रत्याशी विश्वासघातियों से परेशान रहे। नतीजों तक दोनों दलों के महापौर प्रत्याशियों ने विश्वासघातियों के संबंध में चुप्पी साध ली है। दोनों दलों के पार्षद उम्मीदवार जरूर गुबार निकालने के लिए पार्टी कार्यालय व नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह शिकायतें नतीजों के बाद वन-टू-वन बात कर सुनीं जाएंगीं। दूसरी तरफ कांग्रेसियों ने महापौर उम्मीदवार के विरोध में काम करने वाले कांग्रेस के बड़े नेताओं के नाम सीधे कमलनाथ को भेज दिए है।
महापौर व पार्षद उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान विश्वासघातियों से परेशान रहे। चुनाव प्रचार के दौरान तो यह प्रत्याशी चुप्पी साधे रहे। मतदान होने के बाद संगठन से इनकी शिकयातें करने के लिए घूम रहे है। किसने क्या किया, इसका पूरा चिट्टा बना रखा है। भाजपा उम्मीदवारों की सांसद की मौजूदगी में फीड बैक जानने के लिए कुछ उम्मीदवारों ने पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं का मसला उठाने का प्रयास किया। भाजपा  ने यह कहकर रोक दिया कि अभी केवल मतदान का फीड बैक दें। यह शिकायतें बाद में सुनीं जाएंगीं। अभी नतीजों तो आ जाने दो। नतीजों के बाद आधी शिकायतें वैसे ही कम हो जाएंगीं। नतीजों के बाद हारने वाले उम्मीदवार ही शिकायतें करेंगें।
 भाजपा की तरह कांग्रेस में भी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम नहीं करने व खिलाफ प्रचार करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। कुछ लोगों ने महापौर उम्मीदवर के पक्ष काम करने वाले सात से आठ नेताओं के नाम प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा दिये हैं। यह वे लोग हैं, जिन्होंने विरोधी दल के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए अपने लोगों को काल कर गोपनीय बैठकें कर प्रेरित किया। कुछ नाम ऐसे हैं, जो कि दिखावे के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी के साथ खड़े तो नजर आए, लेकिन पार्टी की जीत के लिए कोई काम नहीं किया।