प्रयागराज महाकुंभ में 71 दलित संत महामंडलेश्वर बनेंगे
लखनऊ। 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में एससी-एसटी समाज से 71 लोग महामंडलेश्वर बनेंगे। महामंडलेश्वर की उपाधि जूना अखाड़ा देगा। इन सभी संतों ने दो से तीन साल पहले अखाड़े में संन्यास लिया था। महामंडलेश्वर बनने के बाद इन्हें अखाड़े के मठ-मंदिरों की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके पीछे मुख्य वजह धर्मांतरण रोकना है। सबसे ज्यादा ईसाई मिशनरी एससी-एसटी का धर्मांतरण करा रहे हैं। वहीं, बौद्ध धर्म भी तेजी से इस समाज में पैठ बना रहा है। इसे देखते हुए जूना अखाड़ा के संत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, केरल, महाराष्ट्र और गुजरात पर फोकस कर रहे हैं। यहां आदिवासी-अनुसूचित जाति की आबादी अच्छी-खासी है।
मान्यता प्राप्त 13 अखाड़ों के संत, महंत और महामंडलेश्वर को कुंभ के दौरान मेले में सुविधा और पेशवाई में निकलने का मौका मिलता है। हालांकि, उज्जैन 2016 में हुए कुंभ मेले के दौरान किन्नर अखाड़ा भी अस्तित्व में आया। लेकिन, अखाड़ा परिषद ने उसे मान्यता देने से मना कर दिया। बाद में किन्नर अखाड़ा श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के हिस्से के रूप में शामिल किया गया। अलग मान्यता देने को लेकर विरोध चल रहा है। फिलहाल, तीन संप्रदायों के अखाड़े हैं, जिनमें महामंडलेश्वर का पद होता है। ये तीनों संप्रदाय अलग-अलग हैं। इनमें शैव (शिव को मानने वाले), वैष्णव संप्रदाय (विष्णु और उनके अवतारों को मानने वाले) और उदासीन संप्रदाय शामिल हैं। इसमें शैव संप्रदाय के सात अखाड़े हैं। वैष्णव और उदासीन संप्रदाय के तीन-तीन अखाड़े हैं।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (18 फ़रवरी 2026)
योग से सशक्त होगा युवा वर्ग, शिक्षा के साथ स्वास्थ्य भी आवश्यक :रूपनारायण सिन्हा
सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
छत्तीसगढ़: नक्सल छाया से पर्यटन हब तक की शानदार यात्रा
श्रमिक जन संवाद/श्रमिक सम्मेलन का हुआ आयोजन
मुद्रा लोन से साकार हुआ सपना, बुढाडांड की प्रीति गुप्ता बनीं लखपति दीदी
बड़वानी जिले को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने के लिये कृषि उन्नयन संवाद का हुआ आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुलैथ में बुधवार को कृषक कल्याण वर्ष के पहले किसान सम्मेलन का करेंगे शुभारंभ
हरदा के डायल-112 हीरोज: सूझबूझ और साहस से टली बड़ी दुर्घटना
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियमों पर मंथन