इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना: मध्य प्रदेश में बनी देश की सबसे लंबी जल सुरंग
भोपाल। मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी के पानी को सोन बेसिन तक पहुँचाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में विंध्य पर्वत श्रृंखला के सीने को चीरकर बनाई जा रही लगभग 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने की कगार पर है। इस ऐतिहासिक सुरंग के बन जाने से क्षेत्र के जल संकट को दूर करने और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
विंध्य की पहाड़ियों के बीच टनल बोरिंग मशीन को मिली बड़ी सफलता
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सुरंग की खुदाई में जुटी अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) निर्धारित लक्ष्य को भेदते हुए सीमेंटेड कुएं तक पहुँच चुकी है। इस महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने के साथ ही नर्मदा नदी के पावन जल को सोन बेसिन की ओर मोड़ने की राह में आ रही सबसे बड़ी भौगोलिक बाधा अब पूरी तरह दूर हो गई है।
अंतिम चरण का काम शुरू और मशीनों को बाहर निकालने की तैयारी
परियोजना स्थल पर अब केवल मुख्य कार्यस्थल से विशालकाय बोरिंग मशीनों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शेष बचा है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) दीपक मंडलोई ने बताया कि सुरंग का मुख्य खुदाई कार्य समाप्त होने के बाद अब मशीनों को कुएं से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बेहद जटिल और तकनीकी कार्य को पूरा करने में लगभग डेढ़ महीने का समय लगने की उम्मीद जताई गई है।
जल्द ही सूखी धरती की प्यास बुझाएगा नर्मदा का पावन जल
सुरंग से मशीनों को पूरी तरह बाहर निकालने और अंतिम जांच प्रक्रिया पूरी होते ही इस नवनिर्मित नहर प्रणाली में पानी छोड़ दिया जाएगा। इस टनल के चालू होते ही नर्मदा का जल पहाड़ों के नीचे से होते हुए सोन बेसिन के उन इलाकों तक पहुँचेगा जो लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। यह आधुनिक इंजीनियरिंग का एक ऐसा बेहतरीन उदाहरण है जो आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा।
सिंचाई और पेयजल संकट के स्थाई समाधान की ओर बढ़ते कदम
इस विशाल जल परियोजना के धरातल पर उतरने से कटनी सहित आसपास के कई जिलों के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। इसके साथ ही क्षेत्र के दर्जनों गांवों और कस्बों में पेयजल की किल्लत का भी हमेशा के लिए स्थाई समाधान हो जाएगा। इस परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं ताकि जल्द से जल्द जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।
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