BJP और RJD की अंदरूनी लड़ाई बनेगी PK का हथियार? बांकीपुर में दिलचस्प मुकाबला
पटना। बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। इस सीट पर पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरे जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर की सफलता पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के परंपरागत मतदाताओं को अपने पाले में लाने पर निर्भर है। उनकी रणनीति बनाने वाली टीम का भी यह मानना है कि यदि भाजपा के इस मजबूत वोट बैंक में बिखराव होता है, तो प्रशांत किशोर के लिए चुनावी राह काफी सुगम हो जाएगी। इसी योजना के तहत जन सुराज के प्रमुख रणनीतिकार लगातार भाजपा के उन कैडर वोटरों और असंतुष्ट नेताओं से तालमेल बिठा रहे हैं, जो टिकट वितरण या अन्य कारणों से नेतृत्व से खफा चल रहे हैं। वे इन नाराज चेहरों को यह समझाने में जुटे हैं कि जब तक भाजपा को इस पारंपरिक सीट पर शिकस्त नहीं मिलेगी, तब तक शीर्ष नेतृत्व नए विकल्पों या जमीनी कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देगा।
स्थानीय समस्याओं को बनाया चुनावी हथियार
जन सुराज के कार्यकर्ता इसी बात को आम जनता के बीच जाकर पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं। क्षेत्र की मुख्य समस्याओं जैसे जलभराव, यातायात जाम और लचर बुनियादी ढांचे को मुद्दा बनाकर पार्टी वोटरों के बीच अपनी जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही प्रशांत किशोर की टीम राष्ट्रीय जनता दल के पारंपरिक झुकाव वाले मतदाताओं को भी साधने की कोशिश में जुटी है। भाजपा के मजबूत गढ़ को भेदने के लिए जन सुराज की टोलियां लगातार घर-घर दस्तक दे रही हैं और राज्य में एक बड़े सियासी बदलाव के नाम पर लोगों से समर्थन जुटा रही हैं।
आरजेडी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पदयात्रा
वोट बैंक की इस जंग में प्रशांत किशोर की टीम ने पटना के वार्ड संख्या 29 और 35 के अंतर्गत आने वाले करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड जैसे इलाकों में सघन जनसंपर्क और पदयात्रा की है। इन क्षेत्रों में आरजेडी के समर्थक मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है, जिनसे टीम ने सीधा संवाद कर एक अवसर देने का आग्रह किया है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इन खास मोहल्लों में जन सुराज का ताना-बाना बुनने में आरजेडी के ही कुछ असंतुष्ट नेता पर्दे के पीछे से सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। बांकीपुर के इस इलाके में जलजमाव की समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है, जिसे अब चुनावी बहस के केंद्र में लाया जा रहा है।
दशकों पुराने चुनावी समीकरण बदलने की कवायद
तमाम स्थानीय जन-समस्याओं के बावजूद इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक का राजनीतिक इतिहास मुख्य रूप से भाजपा बनाम आरजेडी के मुकाबले का ही रहा है। आरजेडी के पुराने दौर के शासनकाल को लेकर बने खास नैरेटिव के कारण यहां के आम मतदाता स्थानीय स्तर पर नाराजगी होने के बाद भी अंततः भाजपा के पक्ष में ही लामबंद होते आए हैं। हालांकि, इस बार प्रशांत किशोर के खुद मैदान में आ जाने से मतदाताओं के सामने एक नया और मजबूत विकल्प खड़ा हो गया है। जन सुराज की टीम जनहित से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि अब तक जो मुद्दे चुनावी राजनीति में पीछे छूट जाते थे, वही अब मुख्य प्राथमिकता हैं।
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