होर्मुज पर बढ़ा संकट, नौसैनिक हमले के बाद शिपिंग पर असर
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही युद्धविराम (सीजफायर) की नाजुक डोर आखिरकार पूरी तरह टूट गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हालिया हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर-पार की सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि ईरान के साथ सीजफायर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो अमेरिकी सेना का अगला कदम पहले से कहीं ज्यादा सख्त और विनाशकारी होगा। इस तनाव के चलते दुनिया का सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्ग 'होर्मुज' एक बार फिर पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना का भीषण हमला, रातभर गूंजे धमाके
बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात अमेरिकी नौसेना और जमीनी बलों ने मिलकर दक्षिणी ईरान में अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के मिसाइल सिस्टम, आधुनिक ड्रोन ठिकानों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद उन तमाम सैन्य गढ़ों को नेस्तनाबूद कर दिया गया, जो अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा बने हुए थे। क्षेत्र में हालात इस वक्त बेहद संवेदनशील हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की आजादी (Freedom of Navigation) को बहाल करने और ईरान की हमलावर क्षमता को कुचलने के लिए अतिरिक्त एयर स्ट्राइक का दौर लगातार जारी है।
कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद भड़का अमेरिका
इस महासंकट की शुरुआत 6 और 7 जुलाई को हुई, जब ईरान ने दुस्साहस दिखाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे कम से कम तीन कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला कर दिया। अमेरिका ने इसे सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन माना और पलक झपकते ही जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। पहले दौर की कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने दक्षिणी ईरान में स्थित 80 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों पर सटीक निशाना साधा।
रडार, कमांड सेंटर और युद्धपोत तबाह; चाबहार तक हड़कंप
अमेरिकी हमलों का यह सिलसिला 8 जुलाई को और ज्यादा आक्रामक हो गया। इस नए दौर के हमलों में अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार, एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर्स, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की फास्ट अटैक बोट्स और मुख्य कमांड सेंटरों को मलबे में तब्दील कर दिया। इन भीषण हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तटीय शहरों—बंदर अब्बास, कोनारक और चाबहार में पूरी रात धमाकों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
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