बादाम जितना छोटा, लेकिन कीमत ₹800 किलो! लखनऊ में आम की खास वैरायटी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इन दिनों (3, 4 और 5 जुलाई) तीन दिवसीय 'आम महोत्सव' की धूम है। इस भव्य महोत्सव में आम की 800 से अधिक अनूठी किस्में देश-विदेश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। यह महोत्सव न केवल आम की प्रदर्शनी का केंद्र बना हुआ है, बल्कि पहली बार यहाँ क्रेता-विक्रेता सम्मेलन (बायर्स-सेलर्स मीट) और तकनीकी कार्यशालाओं के जरिए आम उत्पादक किसानों को सीधे खरीदारों, निर्यातकों और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का एक बड़ा मंच भी तैयार किया गया है।
इस बार महोत्सव में आम का दाम उसके नाम, रंग, रूप, वजन, खुशबू, स्वाद और बाजार में डिमांड के आधार पर तय हो रहा है। जहाँ 'मोदी मैंगो' अपने नाम की वजह से जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है, वहीं सुंदर रंग के मामले में 'सेंसेशन' आम और भारी-भरकम वजन के लिए 'हाथीझूल' व 'राजा' आम लोगों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
बादाम के भाव बिक रहा 'अंबिका' और विदेशों से आया 'चकापात'
महोत्सव में अगर खुशबू और स्वाद की बात करें, तो अपनी बेहतरीन महक के लिए 'गुलाब खास' आम लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। वहीं, कीमतों के मामले में 'अंबिका' वैरायटी ने सबको पीछे छोड़ दिया है। यह इस बार का सबसे महंगा आम है, जिसकी कीमत ₹800 प्रति किलो है यानी यह लगभग बादाम के भाव बिक रहा है। इसके अलावा, थाईलैंड का मशहूर 'चकापात' आम भी इस प्रदर्शनी की खास शान बना हुआ है। राहत की बात यह है कि विदेशी मूल के इस आम को अब लखनऊ के मलिहाबाद में भी सफलतापूर्वक तैयार किया जा रहा है।
महोत्सव में छाए आम की इन खास वैरायटियों के अनूठे गुण
यहाँ प्रदर्शित की जा रही आम की 12 प्रमुख वैरायटियों में से कुछ सबसे खास किस्मों की विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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अंबिका आम: इसकी कीमत ₹800 प्रति किलो तक है। यह आम की एक लेट-वैरायटी है, जो मुख्य सीजन और बारिश खत्म होने के बाद बाजार में आती है।
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हाथीझूल: यह इस प्रदर्शनी का सबसे भारी आम माना जा रहा है, जिसका वजन 500 ग्राम से लेकर 5 किलोग्राम तक हो सकता है। हालांकि, स्वाद के मामले में यह थोड़ा फीका होता है।
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मलिहाबादी सफेदा: अपनी बेजोड़ मिठास, रसीलेपन और कम रेशे (फाइबर) के लिए मशहूर यह आम दशहरी का सीजन खत्म होने के बाद बाजार में रफ्तार पकड़ता है।
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जाफरान आम: अपने गहरे जाफरानी (केसरिया) रंग और लाजवाब जायके के लिए जाना जाता है। इस आम को पास लाने पर इसमें से शुद्ध केसर (जाफरान) जैसी महक आती है।
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पपीतियो: इस आम का बाहरी छिलका हूबहू पपीते की तरह दिखाई देता है। सिर्फ रंग-रूप ही नहीं, बल्कि इसका आकार और स्वाद भी पपीते से काफी मिलता-जुलता है।
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आम एप्पल: उत्तराखंड की पहाड़ियों से आई यह खास वैरायटी दिखने में बिल्कुल लाल सेब (एप्पल) जैसी लगती है और इसका स्वाद भी कुछ वैसा ही होता है। यह आम आम दिनों से करीब एक महीने देरी से पकता है।
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चकापात आम: थाईलैंड की इस चर्चित किस्म की बागवानी अब लखनऊ में भी शुरू हो चुकी है, जो अगले साल के सीजन से आम लोगों को खाने के लिए आसानी से उपलब्ध होने लगेगा।
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गुलाबखास: यह आम अपनी गुलाब जैसी भीनी-भीनी खुशबू, रसीले मीठे स्वाद और बिना रेशे वाले गूदे के लिए शौकीनों के बीच बेहद प्रसिद्ध है।
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