पंजाब की राजनीति पर नजर, अकाल तख्त के सामने होगी सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी
अमृतसर: पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक इतिहास में आज सोमवार का दिन बेहद सरगर्मियों भरा साबित हो रहा है। आम आदमी पार्टी सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक आज सर्वोच्च धार्मिक पीठ श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष हाजिर हो रहे हैं। यह पूरी कवायद आप सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए 'जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026' पर अकाल तख्त द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में हो रही है। इस संवेदनशील मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ सत्तापक्ष, बल्कि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी अमृतसर डेरा डाल चुके हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के पूर्व निर्देशानुसार, विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां की अगुवाई में सरकार का यह प्रतिनिधिमंडल अकाल तख्त को अपना लिखित पक्ष सौंपेगा।
जत्थेदार ने सरकार पर लगाया धार्मिक हस्तक्षेप का आरोप
अकाल तख्त साहिब पहुंचने के बाद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने पंजाब सरकार के इस कदम पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि साल 2008 के मूल कानून में यह बदलाव खालसा पंथ की सहमति और प्रमुख सिख संस्थाओं के साथ बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श के गुपचुप तरीके से किया गया। जत्थेदार ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार ने वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सिख समुदाय और गुरु के अटूट रिश्ते के बीच दखल देने की कोशिश की है, जो सीधे तौर पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संशोधन से अकाल तख्त की पारंपरिक और सर्वोच्च धार्मिक संप्रभुता पर भी आंच आई है, जिसके चलते ही तमाम सिख जन-प्रतिनिधियों को तलब कर जवाब-तलब किया गया है।
विपक्ष की मुस्तैदी और संवाद की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी दलों ने भी मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए अकाल तख्त के सामने हाजिरी लगाई है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के शीर्ष नेताओं का मानना है कि गुरु और पंथ से जुड़े इतने बड़े मसले पर बिना आम सहमति के आगे बढ़ना ठीक नहीं है। विपक्ष का कहना है कि धार्मिक विषयों में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले सभी पक्षों और धार्मिक गुरुओं के बीच व्यापक संवाद होना अनिवार्य है, ताकि पंथ की मर्यादा और परंपराओं को कोई ठेस न पहुंचे। राजनीतिक गलियारों में इस पेशी को पंजाब की सत्ता और सिख धार्मिक संस्थाओं के भावी संबंधों की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
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