ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन का असर, वैश्विक कूटनीति पर पड़ सकते हैं बड़े प्रभाव
लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के अचानक इस्तीफे ने न केवल ब्रिटिश राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि इसके अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से उनके हटने के बाद अब ब्रिटेन में नए नेतृत्व की तलाश शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इस बड़े बदलाव का असर वैश्विक कूटनीति, व्यापारिक संबंधों और यूरोपीय राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
पार्टी के भीतर असंतोष और घटती लोकप्रियता बनी वजह
प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश पीएम आवास) से देश को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी अब उन्हें अगले चुनाव में नेतृत्व के लिए उपयुक्त नहीं मानती है। उन्होंने देशहित को सबसे ऊपर रखते हुए पद छोड़ने का फैसला किया और नए बनने वाले नेता को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर उनकी नीतियों और फैसलों को लेकर सांसदों और नेताओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। साथ ही स्थानीय चुनावों में मिली नाकामी और लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था।
जुलाई में होगा नए प्रधानमंत्री का फैसला
ब्रिटेन की राजनीतिक व्यवस्था के अनुसार, वहाँ प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि संसद में बहुमत रखने वाली पार्टी का नेता ही देश का प्रधानमंत्री बनता है। ऐसे में अब लेबर पार्टी के नए नेता का चुनाव ही यह तय करेगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति आगामी जुलाई महीने में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी और उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य जुलाई तक नए नेता के नाम पर मुहर लग जाएगी।
एंडी बर्नहैम रेस में सबसे आगे
ब्रिटेन के नए नेतृत्व की इस रेस में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान में मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पार्टी के विभिन्न गुटों का अच्छा समर्थन हासिल है। उनके अलावा संभावित उम्मीदवारों की सूची में एंजेला रेनर, यवेट कूपर और वेस स्ट्रीटिंग जैसे कद्दावर नेताओं के नाम भी रेस में शामिल हैं।
भारत सहित वैश्विक संबंधों पर पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नेतृत्व परिवर्तन का सीधा असर भारत और ब्रिटेन के बीच चल रहे व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय संघ (EU) के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया में नए प्रधानमंत्री की नीतियां बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। हालांकि स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनके इस कदम को मुख्य रूप से राजनीतिक दबाव और पार्टी के आंतरिक असंतोष का नतीजा ही माना जा रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें ब्रिटेन के इस नए राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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