Pakistan के Khyber Pakhtunkhwa में बड़ा हमला, सेवादार दंपति की हत्या
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां के मरदान जिले में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर घुसकर अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें वहां सेवा दे रहे एक सिख सेवादार दंपति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कायराना हमले में जगन्नाथ और उनकी पत्नी असमावंती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह सनसनीखेज वारदात प्रांतीय राजधानी पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित मरदान के बाबू मोहल्ला इलाके में अंजाम दी गई।
गुरुद्वारा परिसर में घुसकर बरसाईं गोलियां
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ गुरुद्वारा परिसर के भीतर दाखिल हुए थे। उन्होंने वहां मौजूद सेवादार दंपति को निशाना बनाते हुए उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। पवित्र धार्मिक स्थल के भीतर हुई इस दोहरे हत्याकांड की वारदात से पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जांच में जुटी पुलिस, हमलावरों की तलाश तेज
मरदान के जिला पुलिस अधिकारी (DPO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल इस जघन्य हत्याकांड के पीछे के असली कारणों और मकसदों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मामले की तफ्तीश सभी संभावित पहलुओं (Target Killing या आपसी रंजिश) को ध्यान में रखकर की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
गुरुद्वारे के भीतर हुई इस टारगेट किलिंग ने पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच एक बार फिर असुरक्षा की भावना और गहरी चिंता पैदा कर दी है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकिस्तान में सिखों, हिंदुओं और अन्य ईसाई अल्पसंख्यकों पर जानलेवा हमलों और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सुर्खियां बनती रही हैं। भू-राजनीतिक और मानवाधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले ऐसे हमले न केवल वहां की लचर कानून-व्यवस्था को दर्शाते हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों को खौफ के साए में जीने पर मजबूर करते हैं। अब देखना यह होगा कि वैश्विक दबाव के बीच पाकिस्तानी प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है।
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