नामांकन रद्द विवाद के बीच प्रदर्शन ना करने वाले जिला अध्यक्षों पर गिरी गाज
भोपाल: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य के अलग-अलग शहरों और जिलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि, पार्टी के इस देशव्यापी और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने वाले जिला अध्यक्षों और जिला समितियों पर अब संगठन ने सख्त रुख अपना लिया है।
लापरवाह जिला अध्यक्षों को नोटिस, तीन दिनों में मांगा जवाब
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिन जिला अध्यक्षों और जिला समितियों ने पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया था, उन पर अब बड़ी गाज गिरने वाली है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) मुख्यालय ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए ऐसे सभी पदाधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। इन सभी से तीन दिनों के भीतर लिखित में जवाब मांगा गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि तय समय में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो इन पदाधिकारियों के खिलाफ बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
नामांकन खारिज होने से लेकर कोर्ट तक का पूरा विवाद
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल ने अपना नामांकन दाखिल किया था, जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि तेलंगाना में दर्ज एक पुराने कानूनी मामले की जानकारी मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में छिपाई है, जिसके आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।
कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होते ही भाजपा ने रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतार दिया। इसके चलते भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा चुनाव जीत गए। इस झटके के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ भोपाल से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही पार्टी ने कानूनी लड़ाई लड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन वहां से भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली।
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