उत्तराखंड हादसा: परिवार की पूरी उम्मीदें खत्म, मां-बेटी समेत 6 की मौत
ऋषिकेश: उत्तराखंड के ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछले दिनों हुए एक भीषण और दर्दनाक सड़क हादसे में लापता मां-बेटी के शव सोमवार को बरामद कर लिए गए हैं। यह हादसा बीती 2 जून को हुआ था, जिसमें राजस्थान के जैसलमेर जिले के रहने वाले एक ही परिवार के छह सदस्यों सहित कार चालक की मौत हो गई। घटना के बाद से लापता चल रही गुड्डी देवी और उनकी बेटी नम्रता के शवों को गंगा नदी से निकालकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। यह दुखद दुर्घटना देवप्रयाग से करीब 5 किलोमीटर आगे ऋषिकेश की ओर चकासा में एक होटल के पास हुई थी, जहां यात्रियों से भरी एक अनियंत्रित कार करीब 200 मीटर गहरी खाई में गिरकर सीधे उफनती गंगा नदी में समा गई थी।
तीर्थयात्रा से लौट रहा था परिवार
कार में सवार सभी लोग बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इस वाहन में जैसलमेर के एक ही परिवार के 7 सदस्य और हरिद्वार का एक स्थानीय चालक सवार थे। हादसे वाले दिन यानी 2 जून को ही रेस्क्यू टीम ने जैसलमेर निवासी डॉ. दिनेश पंवार, कमला देवी, अश्लेषा और हरिद्वार के कार चालक अमित गुप्ता के शव नदी से बाहर निकाल लिए थे। इस बेहद भयावह हादसे में सिर्फ एक 12 वर्षीय बच्चे आयुष्मान को ही सुरक्षित बचाया जा सका था, जो गंभीर रूप से घायल हो गया था।
गंगा नदी में चला बड़ा सर्च ऑपरेशन
हादसे के बाद से ही परिवार की तीन महिला सदस्य गुड्डी देवी, उनकी बेटियां ज्योत्सना और नम्रता लापता थीं। इनकी खोजबीन के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने स्थानीय गोताखोरों के साथ मिलकर गंगा नदी में लगातार कई दिनों तक 'डीप डाइविंग' के जरिए एक बड़ा सर्च अभियान चलाया। कड़े प्रयासों के बाद बीते रविवार को टीम ने ज्योत्सना का शव देवप्रयाग से 15 किलोमीटर दूर व्यास घाट से बरामद किया था। इसके अगले ही दिन सोमवार को मां गुड्डी देवी का शव भी उसी व्यास घाट से और दूसरी बेटी नम्रता का शव एक होटल के पास नदी से बरामद कर लिया गया।
हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार
सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद प्रशासन ने अंतिम दो मृतकों (मां-बेटी) के शवों को भी उनके रोते-बिलखते परिजनों के हवाले कर दिया है। आज हरिद्वार में ही दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे पहले मिले परिवार के अन्य सदस्यों का अंतिम संस्कार भी परिजनों द्वारा हरिद्वार में ही संपन्न किया गया था। इस भीषण हादसे में जीवित बचे इकलौते 12 साल के बच्चे का इलाज फिलहाल एम्स ऋषिकेश में चल रहा है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से जैसलमेर में रहने वाले उनके रिश्तेदार और पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूबा हुआ है।
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