273 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई, कारण बताओ नोटिस से मचा हड़कंप
रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण (Rationalization - शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन) प्रक्रिया अब बेहद सख्त मोड़ पर पहुंच गई है। शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद नई पदस्थापना वाले स्कूलों में जॉइनिंग न देने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। आदेशों की अवहेलना करने पर राज्य भर के 273 शिक्षकों के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
इसके साथ ही, प्रशासनिक ढिलाही बरतने को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने संयुक्त निदेशकों (JD) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया है।
हजारों शिक्षकों का हुआ था समायोजन
दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत प्रदेश भर के हजारों स्कूलों का पुनर्गठन करते हुए अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन किया था। नियमों के मुताबिक, जिन शिक्षकों का तबादला या नई पोस्टिंग की गई थी, उन्हें तय समय सीमा में आवंटित स्कूलों में जाकर कार्यभार संभालना था। लेकिन प्रदेश के कई जिलों में 273 शिक्षक अब तक नए स्कूलों में हाजिर नहीं हुए, जिसके बाद विभाग को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
वेतन रोकने की गाज: किस पद के कितने शिक्षक शामिल?
DPI के स्पष्ट निर्देशों के बाद आदेश का पालन न करने वाले अलग-अलग संवर्ग के कुल 273 शिक्षकों की सैलरी ब्लॉक कर दी गई है। इस कार्रवाई की जद में आने वाले शिक्षकों का विवरण इस प्रकार है:
| पद / संवर्ग | प्रभावितों की संख्या |
| प्राथमिक शिक्षक | 134 |
| व्याख्याता (लेक्चरर) | 71 |
| शिक्षक (वर्ग-2) | 42 |
| प्रधान पाठक (हेड मास्टर) | 15 |
| प्राचार्य (प्रिंसिपल) | 01 |
अधिकारियों पर भी गिरी गाज: 3 दिन में मांगा जवाब
DPI ने इस मामले में केवल शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले प्रशासनिक अफसरों पर भी हंटर चलाया है। विभाग ने 5 संयुक्त निदेशकों (JD) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। इन सभी अधिकारियों को 3 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया गया है। समय पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
DPI ने तलब की विस्तृत रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए संचालनालय ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों से एक विस्तृत रिपोर्ट (प्रोग्रेस रिपोर्ट) मांगी है, जिसमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल करने को कहा गया है:
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ड्यूटी से नदारद या अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की सूची।
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लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का पूरा प्रतिवेदन।
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संबंधित शिक्षकों के खिलाफ तैयार आरोप पत्र और उनके साक्ष्य।
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आगामी दिनों में की जाने वाली प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई का पूरा खाका।
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क्या था इस प्रक्रिया का उद्देश्य?गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कुल 10,538 स्कूलों का पुनर्गठन किया था, जिसके तहत 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया गया था। इसका उद्देश्य उन स्कूलों में शिक्षक पहुंचाना था जहां स्टाफ की कमी थी। लेकिन कुछ शिक्षकों के अड़ियल रवैये के कारण अब पूरा विभाग 'एक्शन मोड' में नजर आ रहा है।
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