कैदियों को तंबाकू-गांजा उपलब्ध कराने का आरोप, प्रहरी निलंबित
सतना: मध्य प्रदेश की सतना सेंट्रल जेल में कैदियों तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने का एक और गंभीर मामला सामने आया है. शनिवार सुबह नियमित चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक जेल प्रहरी के पास से छुपाकर ले जाई जा रही तंबाकू बरामद की गई. जेल प्रशासन ने इस लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए आरोपी प्रहरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है. इसके साथ ही मामले की अंदरूनी जांच भी शुरू कर दी गई है. इस घटना के बाद से जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और वहां तैनात कर्मचारियों की निष्ठा पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
बेल्ट के नीचे टेप से चिपकाकर रखी थी तंबाकू की पुड़िया
पकड़े गए आरोपी प्रहरी की पहचान बनवारी लाल जाटव के रूप में हुई है, जिसकी शनिवार सुबह की शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई थी. जेल के मुख्य गेट पर जब अंदर जाने वाले कर्मचारियों की रूटीन तलाशी ली जा रही थी, तब सुरक्षा टीम को बनवारी लाल पर शक हुआ. कड़ाई से की गई जांच में प्रहरी के बेल्ट के नीचे छिपाई गई तंबाकू की पुड़िया बरामद हुई. आरोपी ने तंबाकू को बकायदा टेप में लपेटकर इस तरह से छुपाया था कि वह आम चेकिंग में पकड़ में न आए. हालांकि, मुख्य गेट पर तैनात जांच दल की मुस्तैदी के कारण प्रहरी की यह चालाकी धरी की धरी रह गई.
सुरक्षा पर सवाल: पहले गांजा तस्करी में नप चुके हैं एएसआई
सेंट्रल जेल जैसी अति-संवेदनशील जगह पर, जहां अपराधियों को कड़े पहरे में सुधरने के लिए रखा जाता है, वहां के कर्मचारियों द्वारा ही नियमों की धज्जियां उड़ाना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक माना जा रहा है. सतना सेंट्रल जेल में सुरक्षा चूक का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले भी जेल के भीतर गांजा सप्लाई करने के आरोप में एक एएसआई (ASI) स्तर के अधिकारी पर गाज गिर चुकी है. बार-बार सामने आ रही इन घटनाओं से साफ है कि जेल के भीतर नशीली चीजों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो जेल के अनुशासन और सुरक्षा को लगातार चुनौती दे रहा है.
जेल अधीक्षक का कड़ा एक्शन, अब नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
मामले का खुलासा होते ही सतना जेल अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रहरी बनवारी लाल जाटव को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए. जेल प्रशासन अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहा है कि तंबाकू की यह खेप जेल के भीतर किस बैरक या किस खास कैदी तक पहुंचाई जानी थी. अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अन्य कर्मचारियों या बाहरी मददगारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए जेलों में मैन्युअल चेकिंग के बजाय अब आधुनिक डिजिटल मॉनिटरिंग और हाई-टेक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है.
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