डी-डे समारोह में आव्रजन मुद्दे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री की तीखी टिप्पणी
वाशिंगटन: फ्रांस में द्वितीय विश्व युद्ध की ऐतिहासिक 'डी-डे' (D-Day) लैंडिंग की 82वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रवासियों को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है. नॉर्मंडी में बने अमेरिकी स्मारक कब्रिस्तान में सैनिकों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हेगसेथ ने यूरोप में बढ़ रहे अवैध प्रवासन और समुद्री रास्तों से आने वाले शरणार्थियों की तुलना युद्ध के समय होने वाले सैन्य आक्रमण से कर दी. उनके इस बयान के बाद प्रवासन नीतियों और इस तरह के संवेदनशील मंचों पर ऐसे मुद्दों को उठाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
प्रवासियों की आमद को बताया 'खतरनाक विचारधारा का आक्रमण'
अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जिस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए यूरोप के समुद्र तटों पर मित्र देशों के जांबाज सैनिक उतरे थे, आज उसी तरह स्पेन, इटली, ग्रीस और बुल्गारिया के तटों के जरिए खतरनाक विचारधाराएं यूरोप में प्रवेश कर रही हैं. उन्होंने यूरोपीय देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर यूरोपीय राजधानियां इस गंभीर स्थिति से निपटने और अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाएंगी.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त प्रवासन नीति से जुड़े तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीट हेगसेथ का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस सख्त नीति को दर्शाता है, जिसके तहत यूरोपीय देशों की ढीली आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों और कमजोर सीमा सुरक्षा की लगातार आलोचना की जाती रही है. पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन के कई आला अधिकारियों ने भी यूरोप में बिना किसी नियंत्रण के हो रहे प्रवासन पर चिंता जताई है. हेगसेथ के इस बयान को उसी अमेरिकी रुख के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जो अवैध प्रवासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानता है.
बयान पर छिड़ा राजनीतिक विवाद, आलोचक और समर्थक आमने-सामने
रक्षा मंत्री के इस बयान के सामने आते ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. आलोचकों का साफ कहना है कि डी-डे जैसा पवित्र अवसर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान और शहादत को याद करने का दिन है, इसलिए इस ऐतिहासिक और भावुक मंच का इस्तेमाल प्रवासन जैसे विवादित राजनीतिक मुद्दे को उठाने के लिए करना पूरी तरह से अनुचित और शहीदों का अपमान है. दूसरी तरफ, हेगसेथ के समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने केवल उस जमीनी हकीकत और सुरक्षा चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे आज पूरा यूरोप जूझ रहा है. बहरहाल, यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप के कई देशों में सीमा सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और प्रवासियों का मुद्दा पहले से ही राजनीति के केंद्र में बना हुआ है.
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