शेयर ट्रेडिंग के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 84 लाख की ठगी से हड़कंप
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शेयर बाजार में निवेश के जरिए बंपर रिटर्न दिलाने के बहाने एक बड़े कारोबारी और उनके सगे-संबंधियों से 84.63 लाख रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। शातिर जालसाजों ने पीड़ितों को आईपीओ (IPO) और शेयर ट्रेडिंग में कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर अपनी गिरफ्त में लिया। जब महीनों बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को न तो कोई लाभांश (प्रॉफिट) मिला और न ही उनकी मूल रकम वापस आई, तब ठगे जाने का अहसास होने पर पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
व्हाट्सएप ग्रुप और अज्ञात नंबरों से बिछाया जाल
यह पूरा वाकया रायपुर के देवेंद्र नगर थाना इलाके का है। यहाँ के सेक्टर-1 में रहने वाले अविनाश लोखंडे शेयर मार्केट से जुड़ी एक नामी ब्रोकिंग फर्म चलाते हैं। साल 2025 के जून महीने में कुछ अज्ञात साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप के जरिए उनसे संपर्क साधा था और खुद को नामी इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट (निवेश सलाहकार) के तौर पर पेश किया था। इन ठगों ने अविनाश को कुछ ऐसे गुप्त स्टॉक्स और आईपीओ की जानकारी दी, जिनमें निवेश करने पर बहुत ही कम समय में भारी मुनाफा कमाने का दावा किया गया था।
झांसे में आकर पूरे परिवार ने गंवाई जीवनभर की पूंजी
शुरुआत में आरोपियों ने कुछ फर्जी स्क्रीनशॉट और नकली प्रॉफिट चार्ट दिखाकर अविनाश लोखंडे का भरोसा जीत लिया। इसके बाद उनके झांसे में आकर अविनाश और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने मोटी कमाई के चक्कर में अलग-अलग बैंक खातों के जरिए किश्तों में कुल 84.63 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में ठगों ने तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर उन्हें बहलाए रखा, लेकिन जब रकम निकालने (विथड्रॉ) की बारी आई, तो उन्होंने टालमटोल करना शुरू कर दिया।
अचानक बंद हुए नंबर, तब खुला धोखाधड़ी का राज
जब पीड़ित परिवार ने अपनी निवेश की गई मुख्य राशि और उस पर बने मुनाफे को वापस ट्रांसफर करने का दबाव बनाया, तो अचानक उन तथाकथित सलाहकारों से संपर्क पूरी तरह कट गया। आरोपियों के सभी मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप अकाउंट बंद हो गए। किसी भी तरीके से बात न हो पाने पर अविनाश को समझ आया कि वे एक सोची-समझी साइबर वित्तीय ठगी का शिकार हो चुके हैं।
बैंक खातों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच में जुटी पुलिस
धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद पीड़ित कारोबारी ने देवेंद्र नगर थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। पुलिस ने आईपीसी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा कायम कर लिया है। साइबर सेल की मदद से उन बैंक खातों की कुंडली खंगाली जा रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे, साथ ही आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के लोकेशन और आईपी एड्रेस को भी ट्रैक किया जा रहा है।
साइबर नेटवर्क को ध्वस्त करने का पुलिसिया दावा
रायपुर पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस मामले की तकनीकी स्तर पर बारीकी से तफ्तीश की जा रही है और अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर उनके ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि इस अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के सदस्यों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।
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