धार में 721 साल बाद महाआरती, फैसले के बाद वाग्देवी पूजा को लेकर उत्साह
धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। हाईकोर्ट ने बीते 15 मई को दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब मुस्लिम समाज को परिसर के अंदर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई है। इसके चलते इतिहास में यह पहला शुक्रवार है जब भोजशाला परिसर में जुम्मे की नमाज आयोजित नहीं हो रही है। इस नए आदेश को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक अब शुक्रवार के दिन हिंदू समुदाय को वहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति मिल गई है, जिसके बाद से हिंदू श्रद्धालु पूरे दिन वहां धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
कड़ी सुरक्षा के बीच महाआरती और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आज भोजशाला में एक विशेष महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक साल 2003 के बाद यह पहला मौका है जब शुक्रवार के दिन यहां आरती की जा रही है। इस ऐतिहासिक बदलाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और भोजशाला सहित पूरे धार शहर में 2000 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। जिले के कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने साफ किया है कि अदालत के आदेश का हर हाल में पालन कराया जाएगा और सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज के नेताओं ने लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और अपने घरों या मोहल्ले की मस्जिदों में ही नमाज अदा करें। विरोध स्वरूप कुछ लोगों द्वारा आज बाजार बंद रखने और काली पट्टी बांधने की बात भी सामने आई है।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष
हाईकोर्ट के इस फैसले को गलत बताते हुए मुस्लिम पक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद खान और शहर काजी वकार सादिक ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका (SLP) दायर कर दी है। उनका कहना है कि जो जरूरी बातें वे हाईकोर्ट में नहीं रख पाए थे, उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि वे अदालत में यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि इस परिसर में लंबे समय से नमाज पढ़ी जाती रही है। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से जल्द ही इस फैसले पर रोक (स्टे) मिल जाएगी और वहां दोबारा नमाज शुरू हो सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक शांति बनाए रखने की अपील
मुशलमान समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे देश की न्याय व्यवस्था का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक मुस्लिम समाज का कोई भी व्यक्ति भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने नहीं जाएगा। शहर काजी और सोसायटी के पदाधिकारियों ने सभी नागरिकों से शहर में आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने की अपील की है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना था कि भोजशाला मूल रूप से एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है, साथ ही कोर्ट ने इस परिसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का नियंत्रण पहले की तरह ही जारी रखने का आदेश दिया है।
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