ज्ञानभारतम अभियान सरगुजा में मिलीं 140 वर्ष पुरानी तंत्र साधना की दुर्लभ पांडुलिपियां
रायपुर : भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से लगातार ऐतिहासिक एवं दुर्लभ पांडुलिपियां सामने आ रही हैं। इस अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब स्वयं नागरिक आगे आकर अपने घरों में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन को उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नया जीवन मिल रहा है।
पाण्डेय परिवार के पास सुरक्षित है 140 वर्ष पुरानी विरासत
अम्बिकापुर स्थित ब्रह्मपारा राममंदिर के पास रहने वाले पाण्डेय परिवार से तंत्र साधना से जुड़ी लगभग 140 वर्ष पुरानी अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा एवं उपायुक्त आर.के. खूंटे ने पाण्डेय परिवार के निवास पहुंचकर इन ऐतिहासिक धरोहरों का आदरपूर्वक अवलोकन किया। पांडुलिपियों के संरक्षक राकेश पाण्डेय ने बताया कि उनके परिवार के पास तंत्र साधना से संबंधित चार महत्वपूर्ण पांडुलिपियां सुरक्षित हैं।
पांडुलिपि संरक्षक राकेश पाण्डेय ने बताया कि वनदुर्गा तंत्र साधना, भुजंग प्रपात, अथ बगलामुखी, वनदुर्गा अथर्वण रहस्य, ये सभी पांडुलिपियां संवत् 1886 में हमारे प्रपितामह (परदादा) स्वर्गीय चतुरा प्रसाद शर्मा द्वारा हस्तलिखित रूप में तैयार की गई थीं, जिन्हें हमारे परिवार ने पीढ़ियों से सहेजकर रखा है।
नई पीढ़ी को समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रयास
सम्भागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञानभारतम अभियान भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पुरातात्त्विक धरोहरों और जनजातीय विरासत के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अनुष्ठान है। यह समाज में पारंपरिक ज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश में ऐसी पांडुलिपियों का मिलना ऐतिहासिक है और प्रशासन अब इनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।
तकनीकी दस्तावेजीकरण और ऑनलाइन अपलोडिंग
सर्वेक्षण प्रक्रिया को गति देते हुए एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जगदलपुर) से आए सरगुजा प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह ने इन सभी पांडुलिपियों का तकनीकी दस्तावेजीकरण कर इन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया। वहीं, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल ने जिले में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों की प्रगति और भावी कार्ययोजना की जानकारी साझा की। वर्षों से सहेजकर रखी गई इन पांडुलिपियों की सुंदर हस्तलिपि, विशिष्ट संरचना और कलात्मक शैली तत्कालीन विद्वत्ता, साधना परंपरा और भारतीय ज्ञान संस्कृति के गौरवशाली अतीत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।
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