परीक्षा केंद्र में मारपीट से मचा हड़कंप, विभाग ने मांगी पुलिस सुरक्षा
इंदौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर में स्थित स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज विभाग में परीक्षा के दौरान एक अप्रत्याशित हिंसा का मामला सामने आया है। एमए की परीक्षा के समय एक छात्र ने विभागाध्यक्ष के कक्ष में ही अपने शिक्षक पर हमला कर दिया, जिससे परिसर में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि यह विवाद परीक्षा फॉर्म और सेमेस्टर फीस जमा न करने को लेकर शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया और वहां मौजूद स्टाफ को बीच-बचाव कर स्थिति को संभालना पड़ा।
फीस और फॉर्म विवाद ने लिया हिंसक रूप
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में परीक्षा से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा न करना शामिल था, जहाँ आरोपी छात्र पवन इवने ने बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अपनी सेमेस्टर फीस और फॉर्म जमा नहीं किए थे। विभाग के शिक्षक सुखवीर सिंह जाटव ने जब डिजिटल माध्यम से छात्रों को प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए सूचित किया, तो अन्य विद्यार्थियों ने तो नियम का पालन किया लेकिन आरोपी छात्र ने इसे नजरअंदाज कर दिया। जब विभागाध्यक्ष ने छात्र को बुलाकर इस देरी का कारण जानना चाहा और उसी दौरान संबंधित शिक्षक भी वहां पहुंचे, तो छात्र अचानक आवेश में आ गया और शिक्षक के साथ मारपीट शुरू कर दी।
शैक्षणिक संस्थान की सुरक्षा और अनुशासन पर प्रश्नचिह्न
विभागाध्यक्ष के कार्यालय के भीतर शिक्षक पर हुए इस हमले ने विश्वविद्यालय की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और वहां के शैक्षणिक वातावरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों का मानना है कि यदि उच्च शिक्षा के केंद्रों में ही गुरुजन सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो पठन-पाठन का माहौल पूरी तरह प्रभावित होगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुशासन बनाए रखने की क्षमता पर भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि छोटी-छोटी प्रशासनिक बातों पर छात्रों का इस तरह हिंसक हो जाना भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत माना जा रहा है।
प्राक्टोरियल बोर्ड की जांच और संभावित कड़ी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस मामले को घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए जांच का जिम्मा प्राक्टोरियल बोर्ड को सौंप दिया है। बोर्ड अब छात्र के पिछले रिकॉर्ड और इस हिंसक कृत्य के पीछे के कारणों की विस्तृत समीक्षा करेगा ताकि उचित दंडात्मक कदम उठाए जा सकें। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है और छात्र के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि संस्थान की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।
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