पंजाब धमाके मामले में BJP का भगवंत मान पर पलटवार, भेजा मानहानि नोटिस
चंडीगढ़: पंजाब में हालिया विस्फोटों की गूँज अब राजनीतिक गलियारों में मानहानि के मुकदमों तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा धमाकों के पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ होने के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के इस बयान को बेहद आपत्तिजनक और निराधार बताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने उन्हें कानूनी नोटिस थमा दिया है। चुघ ने मांग की है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से अपने शब्दों के लिए माफी मांगें, अन्यथा उन्हें न्यायालय में मानहानि के मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री के आरोपों से भड़का सियासी घमासान
विवाद की जड़ मुख्यमंत्री भगवंत मान का वह बयान है, जिसमें उन्होंने अमृतसर और जालंधर की घटनाओं को चुनाव से जोड़ते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला था। मान ने आरोप लगाया था कि जिन राज्यों में भाजपा चुनाव जीतना चाहती है, वहाँ अक्सर छोटे-छोटे धमाके कराकर साम्प्रदायिक माहौल खराब करने और लोगों को जाति-धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश की जाती है। इस बयान के बाद से ही पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है और भाजपा ने इसे पार्टी की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
कानूनी नोटिस और सात दिनों का अल्टीमेटम
तरुण चुघ की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने बिना किसी साक्ष्य के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को आहत किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री सात दिनों के भीतर अपना बयान वापस लें और सार्वजनिक माफी मांगें। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो झूठी सूचना फैलाने और मानहानि की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। भाजपा का तर्क है कि जब राज्य की पुलिस और डीजीपी खुद इन घटनाओं के पीछे विदेशी ताकतों और आईएसआई नेटवर्क का हाथ होने की आशंका जता चुके हैं, तो ऐसे में मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना है।
सीमावर्ती इलाकों में धमाकों के बाद बढ़ी सुरक्षा
उल्लेखनीय है कि बुधवार रात अमृतसर के खासा कैंट इलाके के पास हुए संदिग्ध धमाकों के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस, सेना, बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर गहन जांच शुरू कर दी थी। जालंधर में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इन घटनाओं में किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इन धमाकों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और अब राजनीतिक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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