दियरा की वो धार्मिक धरती, जहां श्रीराम के दीपदान की कथा से जीवंत है सुल्तानपुर का इतिहास, क्या है यहां की कहानी?
अयोध्या से सटे होने की वजह से सुल्तानपुर जिला न सिर्फ आधुनिक और मध्यकाल, बल्कि त्रेतायुग से काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है. श्री रामचरितमानस में सुल्तानपुर के कई ऐसे स्थलों का जिक्र है, जो सीधा भगवान राम के जीवन से संबंधित है. उसी में एक दियरा के पास बना राम जानकी मंदिर है, जिसे दिरा के राजा ने बनवाया था.
ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्री राम रावण का वध करने के बाद अयोध्या जा रहे थे, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे ब्रह्म हत्या का पाप सुल्तानपुर के ही एक प्राचीन स्थल धोपाप पर गोमती नदी में स्नान करके धुला था. उसी से कुछ दूर पर एक गांव दियरा है. वहीं पर उन्होंने दीपदान भी किया था और इसी स्थल पर दियरा के राजा ने राम जानकी मंदिर का भी निर्माण कराया. आइए जानते हैं कि भगवान श्री राम और दियरा में स्थित इस इमारत का क्या संबंध रहा है.
इन्होंने करवाया था निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, भगवान श्री राम ने गोमती नदी के किनारे जिस स्थान पर दीपदान किया था, उसी स्थान पर दियरा के राजाओं ने एक प्राचीन और ऐतिहासिक इमारत बनवाई, जिसे धर्मशाला के रूप में जाना जाता है. यहां पर भगवान श्री रामचंद्र जी का एक भव्य मंदिर भी बनवाया गया है, जो नागर शैली में बना है. यह सुल्तानपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है, जिसका संबंध रामायण काल से जुड़ा हुआ है. रामचरितमानस में भी भगवान श्री राम के जीवन से संबंधित जोड़ी कई स्थल सुल्तानपुर में मिलते हैं, उन्हीं स्थलों में एक दियरा भी है.
यह है इतिहास
इस मंदिर के पुजारी त्रिवेणी प्रसाद पांडेय बताते हैं कि जब भगवान श्री राम ने रावण का वध किया, तब उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा था. इसी पाप से मुक्ति पाने के लिए वे सुल्तानपुर आए और गोमती नदी के तट पर लंभुआ के धोपाप नामक स्थान पर स्नान किया था. स्नान करने के बाद वे दियरा पहुंचे, जहां उन्होंने दीपदान किया और तभी से इस स्थान को “दियरा” के नाम से जाना गया. दियरा एक ऐसा स्थल है, जो सुल्तानपुर के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
लोगों ने की यह मांग
इस प्राचीन स्थल को दियरा और भव्य बनाने के लिए स्थानीय लोग यह मांग भी कर रहे हैं कि दियरा घाट और इस धर्मशाला को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की ऐतिहासिक पहचान भी देश-दुनिया तक पहुंच सके. यह मंदिर न सिर्फ सुल्तानपुर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि अमेठी, जौनपुर, अंबेडकर नगर के लोग भी यहां पर दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं. इसी स्थल के बगल में दियरा राजा का महल भी है, जो प्राचीन धरोहर माना जाता है.
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