लंबे समय से जुड़े मामलों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी तलब
जबलपुर। जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के कद्दावर कर्मचारी नेता बंशबहोर पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिकंजा कसते हुए जांच की रफ्तार तेज कर दी है। लोकायुक्त एसपी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को पत्र लिखकर आरोपी कर्मचारी के पूरे करियर का वित्तीय कच्चा चिट्ठा तलब किया है।
40 साल के सेवाकाल का खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
लोकायुक्त पुलिस ने बंशबहोर पटेल के खिलाफ प्रकरण क्रमांक ई-315/2024 दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि पिछली बार दी गई जानकारी अधूरी थी, इसलिए अब नए सिरे से डेटा मांगा गया है।
जांच का दायरा: सन 1985 से लेकर अब तक उन्हें मिले वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं का साल दर साल ब्यौरा मांगा गया है।
- नियमितीकरण: उनके दैनिक वेतन भोगी के दौर से लेकर 1994 में हुए उनके नियमितीकरण तक की पूरी गणना की जाएगी।
- वित्तीय लाभ: जांच दल ने भविष्य निधि (PF) से निकाली गई राशि और अन्य आर्थिक लाभों की जानकारी भी अलग से देने को कहा है।
पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
11 बार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रह चुके बंशबहोर पटेल पर पद की धौंस दिखाकर अवैध कमाई करने के कई आरोप हैं:
- भर्ती और खरीदी में खेल: आरोप है कि शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्ति और उपकरणों की बड़ी खरीदी में उन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया।
- नियम विरुद्ध लाभ: दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के गलत तरीके से नियमितीकरण और तकनीकी स्टाफ को अनुचित उच्च वेतनमान दिलवाने के बदले मोटी रकम वसूलने का आरोप भी उन पर लगा है।
- विशाल संपत्ति: शिकायत के अनुसार, इसी अवैध धन से उन्होंने जबलपुर में तीन आलीशान मकान, कई एकड़ खेती की जमीन और दर्जनों वाहन खरीदे हैं। लोकायुक्त अब इन संपत्तियों की कीमत और उनकी कानूनी कमाई का मिलान कर रही है।
रिटायरमेंट से ठीक पहले फंसा कानूनी पेंच
बंशबहोर पटेल इसी साल सितंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके सेवाकाल के अब मात्र 5 महीने शेष हैं, लेकिन लोकायुक्त की इस सक्रिय जांच ने उनकी विदाई को संकट में डाल दिया है।
- अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): जांच लंबित होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए उन्हें क्लीन चिट देना मुश्किल होगा।
- रुकेगा भुगतान: नियमों के मुताबिक, यदि भ्रष्टाचार की जांच जारी रहती है, तो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फंड और अन्य लाभों पर रोक लग सकती है।
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