स्कूल खुले, लेकिन किताबें गायब: यूपी के 25 जिलों में धीमी पड़ी वितरण प्रक्रिया
लखनऊ | प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
नामांकन में तेजी लाने के निर्देश
स्कूल चलो अभियान के तहत अब तक कक्षा एक में पिछले साल की अपेक्षा दो लाख से ज्यादा नामांकन हुए हैं। कक्षा पांच से छह में 6.66 लाख, आठ से नौ में 18912 नामांकन हुए हैं। कक्षा एक के नामांकन में अलीगढ़ 41.77 फीसदी के साथ पहले स्थान पर है। जबकि श्रावस्ती की स्थिति सबसे खराब है। कक्षा पांच से छह में 47.74 फीसदी के साथ कौशांबी पहले व हरदोई 20.53 फीसदी के साथ सबसे पीछे है। कक्षा आठ से नौ में अमेठी 2.36 के साथ पहले व औरैया व कानपुर नगर सबसे खराब स्थिति में हैं। विभाग ने इसमें सुधार व तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
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