गर्भावस्था में महिला के शरीर में होते हैं कई बड़े बदलाव
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और भावनात्मक समय होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस दौरान सभी महिलाओं को अपनी सेहत और दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था में डाइट का ध्यान और भी जरूरी हो जाता है, ये सिर्फ महिला ही नहीं गर्भ में पल रहे शिशु के संपूर्ण विकास के लिए भी जरूरी है।विशेषज्ञ बताते हैं, गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव तक महिला के शरीर में लगातार कई तरह के बदलाव होते रहते हैं। इस दौरान कई प्रकार के हार्मोन्स बढ़ते हैं, मेटाबॉलिज्म में बदलाव आता है, वजन बढ़ने लगता है और इंसुलिन की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। यही वजह है कि कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज हो जाता है। गर्भावस्था की स्थिति महिलाओं के ब्रेन पर भी अलग तरह से असर डालती है। आइए जानते हैं कि इस दौरान शरीर में क्या-क्या बदलाव आता है और गर्भास्था में किन समस्याओं को लेकर महिलाओं को सावधान रहने की जरूरत होती है?
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ अमृता सिंह बताती हैं, प्रेग्नेंसी के दौरान सजगता और जागरूकता बहुत जरूरी है, ये महिला और शिशु दोनों के लिए जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। ये दिक्कतें वैसे तो आम हैं पर अगर लगातार शुगर या बीपी बढ़ा रहता है तो इसका मां और बच्चे दोनों की सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर पड़ सकता है।
यही कारण है कि सभी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान खानपान और शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है।
गेस्टेशनल डायबिटीज का हो सकती हैं शिकार
डॉ अमृता बताती हैं, कई बार महिलाएं वैसे तो बिल्कुल स्वस्थ होती हैं, फिर भी प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर बढ़ जाता है। यह स्थिति वैसे तो अस्थायी होती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- गर्भावस्था के दौरान होने वाले डायबिटीज को गेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है।
- यह आमतौर पर दूसरी या तीसरी तिमाही में सामने आती है।
- इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन सही से काम नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।
- यदि महिला का वजन ज्यादा है, परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज रहा है, खानपान ठीक नहीं है तो इससे गेस्टेशनल डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ जाता है।
गर्भावस्था बदल देती है दिमाग की संरचना
अध्यनों में पाया गया है कि गर्भावस्था सिर्फ शरीर को ही नहीं बल्कि महिला के मस्तिष्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्भधारण से लेकर प्रसव के बाद तक मस्तिष्क में ऐसे बदलाव आते हैं जो जीवनभर बने रह सकते हैं। शोधकर्ताओं ने ब्रेन इमेजिंग का इस्तेमाल करके गर्भवती महिलाओं के दिमाग की संरचना को स्कैन किया।नतीजों में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के दिमाग में कुछ हिस्से सिकुड़ते और कुछ हिस्से मजबूत होते हैं। इनका सीधा संबंध मातृत्व की प्रवृत्ति, भावनात्मक जुड़ाव और बच्चे की देखभाल की क्षमता पर पड़ता है।
ब्रेन पर क्या होता है असर?
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्सिलोना की न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. एलिसा ई. ह्यूज कहती हैं, गर्भावस्था मस्तिष्क को इस तरह असर डालती है कि महिला को बच्चे की जरूरतों को समझने और ख्याल रखने की क्षमता बेहतर ढंग से मिल सके। यह प्राकृतिक तौर पर एडाप्टिव प्रोसेस है, जिसे हम अब वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर पा रहे हैं।
- शोध में यह भी पाया गया है कि मातृत्व के दौरान यह दिमागी परिवर्तन महिलाओं को सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील बनाने में मदद करते हैं।
- अत्यधिक तनाव, नींद की कमी आपकी दिमागी सेहत पर और भी असर डाल सकती है।
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