PMI में गिरावट: मार्च में सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी, 14 महीने की सबसे कमजोर वृद्धि
नई दिल्ली। भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे धीमा विस्तार है। हालांकि, सूचकांक अब भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि जारी है।
पीएमआई (Purchasing Managers' Index) एक आर्थिक सूचकांक है, जो बताता है कि किसी देश के उद्योग या सेवा क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे कंपनियों के खरीद प्रबंधकों (Purchasing Managers) से सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है।
कैसे समझें?
50 से ऊपर- आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है
50 से नीचे- गतिविधि घट रही है
50 के आसपास- स्थिर स्थिति
क्या है ये सुस्ती की वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की इस सुस्ती की प्रमुख वजह नए कारोबार की रफ्तार में कमी रही। मार्च में नए ऑर्डर जनवरी 2025 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। वित्त, रियल एस्टेट और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। हालांकि, निर्यात मांग ने राहत दी। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी ऑर्डर लगभग रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए, जिनमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका से मजबूत मांग देखने को मिली। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का नकारात्मक असर बाजार स्थितियों, मांग और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा, जिससे कुल कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ।
निर्यात आधारित मांग से सेक्टर को सहारा मिला
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मार्च में सेवा क्षेत्र विस्तार में बना रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने वृद्धि की रफ्तार कमजोर हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात आधारित मांग मजबूत रही, जिससे सेक्टर को सहारा मिला।
महंगाई को लेकर चिंता
रिपोर्ट में महंगाई के दबाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनपुट लागत लगभग चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका कारण ईंधन, परिवहन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी है। इसके बावजूद, कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। करीब 12 वर्षों में पहली बार कारोबारियों ने उत्पादन को लेकर इतनी सकारात्मक उम्मीद जताई है, जो आने वाले समय में मांग और बाजार परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद पर आधारित है। कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जो आगे के महीनों में चुनौती बन सकता है।
दिल्ली वालों के लिए जरूरी खबर! 17 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री बंद, सफर प्रभावित
क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लौटेगा छात्रों का भरोसा? शिक्षा संकट पर बड़ी बहस
अमेरिका में 'रामायण' ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर बोले- 'राहा को यह फिल्म दिखाने के लिए उत्साहित हूं'
आज इन 5 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, इंदौर-भोपाल में भी बरसेंगे बादल
कच्चा तेल, बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल संकेतों से बाजार पर दबाव, निवेशक क्या करें?
लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक टली, राज्यसभा में पेपर लीक पर जोरदार हंगामा
'इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं', सरकार और CJP के बीच आज निर्णायक वार्ता
नए परमाणु सहयोग समझौते से मचा बवाल, अमेरिका-सऊदी डील पर उठे सवाल