राज्य में कृषि एवं जैव ईंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि एवं जैव ईंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पहली बार राज्य में सफेद चुकंदर (शुगरबीट) के किस्म एलएस-6 की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ गन्ना की फसल के साथ अंतफसली प्रणाली पर एक संयुक्त अनुसंधान परियोजना प्रारंभ की गई है।
यह परियोजना छत्तीसगढ़ जैव ईंधन विकास प्राधिकरण, रायपुर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ एवं राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर के संयुक्त सहयोग से संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम में डॉ सीमा परोहा निदेशक, डॉ लोकेश बाबर, सहायक आचार्य (कृषि रसायन), राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर एवं सुमित सरकार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संतोष कुमार मैत्री, सहायक परियोजना अधिकारी, छत्तीसगढ़ जैव ईंधन प्राधिकरण, रायपुर, द्वारा सयुंक्त रूप से कार्य किया जा रहा है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सफेद चुकंदर से बायो-एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं, उसकी आर्थिक व्यवहार्यता तथा किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना है। साथ ही, गन्ना के साथ शुगरबीट की अंतफसली प्रणाली के माध्यम से एक ही भूमि पर दो फसलों का उत्पादन कर किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
गन्ना एक दीर्घकालीन फसल है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में खेत का कुछ हिस्सा खाली रहता है। इस खाली स्थान का उपयोग सफ़ेद चुकुन्दर जैसी अल्पकालीन फसल (6 माह) के लिए किया जा सकता है, जिससे किसानों को गन्ने के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। यह मॉडल किसानों के लिए अतिरिक्त आय स्रोत, भूमि की बेहतर उपयोगिता तथा जैव ईंधन क्षेत्र के लिए वैकल्पिक कच्चा माल उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो सकता है। यह पहल छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलते हुए राज्य को जैव ईंधन क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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