महादेव की पूजा के समय इन मंत्रों से करें ध्यान, भगवान शिव होंगे प्रसन्न, पूरी होंगी मनोकामनाएं!
भगवान शिव की पूजा प्रारंभ करते समय उनका ध्यान किया जाता है. इसके लिए पुराण, शास्त्र आदि में अलग-अलग मंत्र दिए गए हैं. सामान्य लोगों के लिए इन सभी मंत्रों को याद करना मुश्किल होता है. ऐसे में आप भगवान शिव के कुछ ध्यान मंत्रों को याद कर सकते हैं और पूजा के समय उनका उपयोग कर सकते हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के ध्यान मंत्रों के बारे में.
भगवान शिव के ध्यान मंत्र
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं,
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं,
विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
हिंदी में अर्थ: मैं प्रतिदिन उस शिव का ध्यान करता हूं, जो चांदी के पर्वत के समान शरीर वाले हैं, जो अपने सिर पर सुंदर चंद्रमा को आभूषण के रूप में धारण करते हैं. रत्नों के अनेक आभूषण से वे चमकते हैं, अपने हाथ में परशु धारण करते हैं, हाथ वर मुद्रा में रखते हुए प्रसन्न रहते हैं, कमल के आसन पर विराजमान हैं, उनकी सभी देवता स्तुति करते हैं, बाघ की खाल उनका वस्त्र है, वे पूरी सृष्टि के कारण, संसार की उत्पत्ति के बीज, सभी प्रकार के भय को दूर करने वाले, 5 मुख और 3 आंखों वाले हैं.
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
हिंदी में अर्थ: जो कपूर के समान श्वेत रंग के हैं, जो स्वयं ही करुणा के अवतार हैं यानि सभी पर दयालु हैं, जो इस पूरी सृष्टि के सार हैं, जो अपने गले में नागराज वासुकी को माला के रूप में धारण करते हैं, वो हमेशा मेरे हृदय में निवास करते हैं, उस महादेव और भवानी यानि माता पार्वती को मैं नमस्कार करता हूं.
ओम नम: शिवाय
यह भगवान शिव का पंचाक्षर मंत्र है. यह सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है. इस मंत्र का जाप करके आप शिव कृपा प्राप्त कर सकते हैं. जिनको ध्यान मंत्र याद नहीं है, वे सामान्य तौर पर इस मंत्र से ध्यान करके पूजा कर सकते हैं. वैसे सामान्य लोग इस मंत्र का ही उच्चारण करके पूजा कर लेते हैं.
ध्यान लगाने की विधि
शिव जी की पूजा के लिए सबसे पहले कंबल या कुश के आसन पर बैठना चाहिए. उसमें बैठने की मुद्रा सुखासन में होनी चाहिए. उसके बाद दोनों हाथों से अंगूठे और तर्जनी के पोरों को जोड़कर ज्ञान मुद्रा बनाते हैं. उसके बाद अपने ललाट पर दोनों भौहों के बीच आज्ञा चक्र पर भगवान शिव के शांत स्वरूप का ध्यान लगाएं और उनके मंत्र पढ़ें. मन में यह भाव लाएं कि आप पर शिव की कृपा हो रही है.
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