बंगाल चुनाव में CRPF कमांडेंट का निलंबन वापस
बीरभूम|पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ड्यूटी के दौरान टीएमसी कार्यालय में सीआरपीएफ जवानों के 'कैरम' खेलने की सजा अब 'कमांडेंट' को नहीं मिलेगी। सीआरपीएफ के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के डीआईजी (सीआर एंड विजिलेंस) ने एक अप्रैल को निलंबन रद्द करने का आदेश जारी किया है। बिना किसी विभागीय जांच के कमांडेंट का निलंबन, यह मामला सीआरपीएफ में तूल पकड़ने लगा था। कैडर अफसरों में इस आदेश को लेकर नाराजगी थी। इसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया।
बता दें कि यह मामला पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का है। यहां पर सीआरपीएफ की एफ-123 वीं बटालियन, जिन्हें एडहॉक बटालियन संख्या 318 के नियंत्रण में सियूरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत सामान्य एरिया में तैनात किया गया था। कानून व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान 27 मार्च को उक्त बटालियन का एक सेक्शन 'टीएमसी' कार्यालय में 'कैरम' खेलते हुए पाया गया। यह मामला सोशल मीडिया में भी खूब चला था। यह शिकायत, चुनाव आयोग के पास भी पहुंची थी।
इसके चलते सीआरपीएफ के एसआई 'जीडी' जनवेद सिंह, हवलदार श्याम प्रमोद बाबूलाल, सिपाही जयपाल गोदरु वैद्य, आजाद पटेल, अनिल कुमार लोधी और सुरेश प्रजापत को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। यह कार्रवाई यहीं पर समाप्त नहीं हुई, इसके बाद सीआरपीएफ मुख्यालय ने एडहॉक कमांडेंट अनूप कुमार सिंह को भी सस्पेंड कर दिया। अनूप सिंह, 123वीं बटालियन में 'सेकेंड इन कमांड' हैं। उन्हें चुनावी ड्यूटी के दौरान 318 वीं बटालियन का एडहॉक कमांडेंट बनाया गया था।
अनूप कुमार सिंह, कैरम खेलने के दौरान जवानों के साथ नहीं थे। उनका नाम किसी सोशल मीडिया में भी नहीं था। सिंह का कसूर इतना था कि उनके नियंत्रण वाली बटालियन के जवान कैरम खेलने में शामिल थे। इसी वजह से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। कैडर अफसरों ने इस मामले में कहा था कि बल मुख्यालय ने यहां पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। दूसरे बलों या पुलिस में निचले स्तर पर कई तरह की शिकायतें आती हैं। ऐसे सभी मामलों में कमांडेंट या एसपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। अगर कहीं पर ऐसी कार्रवाई होती भी है तो नियमानुसार, पहले उस मामले की गहराई से जांच होती है। यहां पर तो बल मुख्यालय ने तुरंत ही कमांडेंट को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया था।
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