भारत की काले जादू की राजधानी...........जहां चुनाव के दौरान नेता लगाते हैं हाजरी
नई दिल्ली। असम के ब्रह्मपुत्र तट पर बसा मायोंग गांव केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि रहस्य, रोमांच और प्राचीन मान्यताओं का केंद्र है। इस गांव को अक्सर भारत की काले जादू की राजधानी कहा जाता है। गुवाहाटी से करीब 50 किलोमीटर दूर गांव अपनी तंत्र विद्या और जादू के दावों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। वहीं चुनावी माहौल में मायोंग की भूमिका अलग होती है। यह गांव जागीरोड विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहाँ भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री पीजूष हजारिका सक्रिय हैं। स्थानीय तांत्रिकों और गांव वालों का दावा है कि चुनाव के समय कई नेता केवल विकास के वादे करने नहीं आते, बल्कि अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए यहां टोटके और तंत्र साधना करते हैं। तांत्रिकों का कहना है कि नेता अक्सर रात में गुपचुप तरीके से आते हैं और विशेष पूजा कराते हैं। हालांकि, तांत्रिक केवल सकारात्मक कार्यों के लिए अपनी विद्या का उपयोग करते हैं और किसी को नुकसान पहुँचाने वाले उपायों को अस्वीकार कर देते हैं।
मायोंग का इतिहास खौफनाक किंवदंतियों से भरा है। कहा जाता है कि 1337 में दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद शाह की एक लाख घुड़सवारों की सेना मायोंग के जंगलों में जादू के प्रभाव से गायब हुई थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां के मंत्र इतने शक्तिशाली हैं कि वे किसी इंसान को हवा में गायब कर सकते हैं या बकरी या मुर्गा बना सकते हैं। गांव के संग्रहालय में रखी पुरानी तलवारें और तांबे की प्लेटें, जिन पर गुप्त मंत्र अंकित हैं, इन दावों की गवाही देती हैं। करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव की खासियत यह है कि लगभग हर घर में कोई न कोई तांत्रिक या ओझा मौजूद है। पीढ़ियों से यह विद्या संरक्षित की जा रही है। स्थानीय निवासी जो पेशे से दुकानदार हैं, अपने घर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड डायरी में रखते हैं। लोग यहां शारीरिक और मानसिक समस्याओं का इलाज मंत्रों और लकड़ी के सूप के माध्यम से करवाते हैं, न कि आधुनिक दवाओं से। आज भी मायोंग की साख कम नहीं हुई है। पास ही स्थित पोबितोरा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी में आने वाले पर्यटक भी गांव की रहस्यमयी हवाओं का अनुभव करने आते हैं। मायोंग के लोग इसे डराने वाली चीज़ नहीं बल्कि अपनी संस्कृति और जीवन का हिस्सा मानते हैं और इसे एक कला के रूप में संरक्षित करना चाहते हैं।
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