परमाणु युद्ध की आशंका: ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला, तेल अवीव में एक की मौत
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने पुष्टि की है कि शुक्रवार देर रात बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को एक बार फिर प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या ड्रोन) के जरिए निशाना बनाया गया। 28 फरवरी से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए इस युद्ध में बुशहर प्लांट पर यह तीसरा बड़ा हमला है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस ताजा हमले में किसी के हताहत होने या संयंत्र को किसी बड़े तकनीकी नुकसान की खबर नहीं मिली है, लेकिन परमाणु ठिकानों को बार-बार निशाना बनाए जाने से पूरी दुनिया में न्यूक्लियर एक्सीडेंट का खौफ पैदा हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस घटनाक्रम पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यद्यपि मौजूदा हमलों में अब तक कोई बड़ा रिसाव या नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन परमाणु ठिकानों पर निरंतर सैन्य कार्रवाई का अंजाम बेहद विनाशकारी हो सकता है। आईएईए फिलहाल ईरानी अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षा उपायों की पुष्टि कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी रेडियोधर्मी सामग्रियां सुरक्षित रहें। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि बुशहर के अलावा खोंडाब हेवी वॉटर प्लांट और खुजेस्तान स्टील फैक्ट्री जैसी औद्योगिक इकाइयां भी सैन्य तनाव के कारण बढ़ते जोखिम के घेरे में हैं।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों ने इजरायल के भीतर भी तबाही मचाई है। इजरायली राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा मैगन डेविड एडोम और पुलिस के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई एक मिसाइल शुक्रवार रात तेल अवीव के मेट्रोपॉलिटन इलाके में गिरी। यह हमला एक विशेष प्रकार की क्लस्टर म्यूनिशन मिसाइल से किया गया था, जो हवा में फैलकर कई छोटे बमों में बदल जाती है। इस घटना में तेल अवीव में काम कर रहे एक 60 वर्षीय निर्माण श्रमिक की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, मिसाइल फटने के बाद निकले छर्रों की चपेट में आने से उस व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। ईरान ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि घनी आबादी वाले शहरों और संवेदनशील परमाणु केंद्रों तक पहुंच गया है। वैश्विक समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से परमाणु संयंत्रों पर प्रभावी हमला होता है, तो इससे निकलने वाला रेडिएशन न केवल इस क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अपूरणीय त्रासदी बन सकता है।
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