भारत-अमेरिका रिश्ते साझा हितों पर आधारित: कोल्बी
नई दिल्ली|पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत दौरे पर आएं अमेरिकी युद्ध नीति उप सचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने दिल्ली में आयोजित एक विशेष सत्र में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में विदेश नीति व्यावहारिक होनी चाहिए और उसका फोकस नतीजों पर होना चाहिए। उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात का जिक्र करते हुए कहा कि आज के हालात में देशों को लचीली और परिस्थिति के हिसाब से रणनीति अपनानी चाहिए।कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह केवल औपचारिकताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के साझा हितों पर टिका है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को विशेष संबंध बताया था।
भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों पर कोल्बी का जोर
भारत अमेरिका के मजबूत रिश्तों को लेकर कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका को हर मुद्दे पर सहमत होना जरूरी नहीं है। कोल्बी ने कहा कि सबसे जरूरी यह है कि दोनों देशों के हित और लक्ष्य बड़े मुद्दों पर एक जैसे होते जा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि मतभेद होने के बावजूद रणनीतिक सहयोग मजबूत किया जा सकता है। दोनों देशों के रिश्ते दिखावे पर नहीं, बल्कि लंबे समय के साझा हितों पर आधारित हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में कोई एक देश हावी न हो। साथ ही, दोनों देश खुला व्यापार और अपनी-अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के पक्ष में हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर की नीति की तारीफ
इस दौरान कोल्बी ने एस जयशंकर की सोच की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रवाद और व्यावहारिक विदेश नीति की अहमियत को सही तरीके से रखा है। उनके कहा कि भारत एशिया में स्थिर संतुलन बनाने को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहा है। कोल्बी ने जोर दिया कि यह सोच अमेरिका के दृष्टिकोण से भी मेल खाती है। उन्होंने कहा कि दोनों देश मानते हैं कि हर देश को अपने हितों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने का अधिकार है।
एशिया में संतुलन और सहयोग
कोल्बी ने कहा कि:
- भारत और अमेरिका दोनों एशिया में स्थिर और संतुलित शक्ति व्यवस्था चाहते हैं।
- जब अमेरिका अपने लोगों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए काम करता है और भारत अपने नागरिकों के लिए, तो दोनों के प्रयास एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।
- दोनों देशों को हर मुद्दे पर पूरी सहमति की जरूरत नहीं है, बल्कि जहां जरूरी हो वहां सहयोग करना ही अहम है।
- भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत है और आगे भी साझा हितों के आधार पर और गहरी होती रहेगी।
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