सुप्रीम कोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज को नहीं दी तत्काल राहत, मामला फिर हाई कोर्ट के पाले में, 18 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश, 20 मार्च को हाई कोर्ट करेगा अंतरिम राहत पर फैसला
नई दिल्ली/भोपाल। भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अहम मामले में तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए गेंद फिर से हाई कोर्ट के पाले में डाल दी है। कोर्ट ने साफ किया कि अंतरिम राहत पर फैसला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ही करेगा।
क्या है सोम कंपनी का पूरा मामला
सोम डिस्टिलरीज और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अपने शराब लाइसेंस के सस्पेंशन के खिलाफ तथा वर्ष 2026-27 के नए टेंडर में भाग लेने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
यह याचिका हाई कोर्ट के 5 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें बिना विपक्ष का जवाब लिए कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी।


सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ (न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची सहित) ने सुनवाई के दौरान—
राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को 18 मार्च 2026 तक काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट से कहा कि वह 20 मार्च 2026 को अंतरिम राहत पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय ले, चाहे जवाब दाखिल हो या न हो। यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है। किन कानूनों पर रहेगा फोकस सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि अंतरिम राहत पर विचार करते समय मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 भारतीय माल-चिह्न अधिनियम, 1889 के प्रावधानों को ध्यान में रखा जाए।
आगे पूरा मामला फिर से हाई कोर्ट में
हाई कोर्ट में 20 मार्च को सुना जाएगा, जहां यह तय होगा कि—सोम डिस्टिलरीज को राहत मिलती है या नहीं,कंपनी 2026-27 के शराब टेंडर में हिस्सा ले पाएगी या नहीं
निष्कर्ष:नजरें 20 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई सीधी राहत न देते हुए प्रक्रिया को तेज किया है और हाई कोर्ट को समयबद्ध तरीके से फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजरें 20 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं।
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