भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राज्यसभा सीट पर ठोका दावा, मानहानि केस में संजय राउत को राहत
महाराष्ट्र में राज्यसभा की खाली सात सीटों में से विपक्ष सिर्फ एक सीट जीत सकती है। उस एक सीट पर गठबंधन के घटक दलों के बीच जारी खींचतान के बीच कांग्रेस ने अपनी दावेदारी पेश की है। इससे विपक्षी दलों के समूह महा विकास आघाडी (एमवीए) में फूट पड़ गई है। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त होने का हवाला देते हुए राज्यसभा सीट पर कांग्रेस का दावा ठोंका, जबकि कुछ दिन पहले शिवसेना (यूबीटी) ने कहा था कि इस सीट पर उसका पहला अधिकार है। एमवीए के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यसभा सीट पर विचार-विमर्श करने के लिए बैठक की। उसके बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस ने प्रस्ताव रखा है कि राज्यसभा सीट उसे दिया जाए। एजेंसी
राउत सोमैया की पत्नी के मानहानि मामले में बरी
मुंबई की एक सत्र अदालत ने शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) सांसद संजय राउत की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया की तरफ से दायर मानहानि मामले में बरी कर दिया। भाजपा नेता की पत्नी ने अदालत का रुख कर यह दावा किया था कि राउत ने उनके और उनके पति के खिलाफ निराधार एवं मानहानिकारक आरोप लगाए। पिछले साल एक मजिस्ट्रेटी अदालत ने राउत को मामले में दोषी मान 15 दिन की जेल की सजा सुनाई।शिवसेना नेता ने बाद में सत्र अदालत में मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उनकी याचिका स्वीकार कर ली। राउत ने मीरा-भयंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण से संबंधित 100 करोड़ रुपये के घोटाले में दंपति का नाम घसीटा था।
महाराष्ट्र महिला आयोग ने बडलीपुर में की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकंकर ने बडलीपुर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जो मानव अंडाणु रैकेट के खुलासे के बाद आयोजित की गई। अधिकारियों के अनुसार, कम आर्थिक पृष्ठभूमि वाली कम से कम 40 महिलाओं को धोखाधड़ी करके कई बार अंडाणु दान के लिए लुभाया गया। मल्टी आईवीएफ सेंटर, जो केवल नासिक में लाइसेंसधारी है, थाने में बिना अनुमति संचालन कर रहा था।चाकणकर ने कहा कि मामले की गंभीरता पहले सोची गई से कहीं अधिक है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार पांचों आरोपियों के पास कोई मेडिकल योग्यता नहीं थी, बावजूद इसके उन्होंने हार्मोनल इंजेक्शन और एनेस्थीसिया के तहत अंडाणु निकासी की। उन्होंने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और स्थानीय पुलिस को आदेश दिया कि सभी सोनोग्राफी सेंटर और आईवीएफ क्लीनिक के लाइसेंस की जांच की जाए।
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