नृत्यांगना शक्ति मोहन ने शुरु की वैश्विक सांस्कृतिक यात्रा
मुंबई । प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना शक्ति मोहन ने अपने विशेष यूट्यूब प्रोजेक्ट ‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ के जरिए एक वैश्विक सांस्कृतिक यात्रा शुरू की है। यह सफर सिर्फ विभिन्न देशों तक सीमित नहीं, बल्कि अलग-अलग सभ्यताओं और उनकी नृत्य परंपराओं को नए दृष्टिकोण से समझने का प्रयास भी है। हाल ही में उन्होंने इस प्रोजेक्ट का नया एपिसोड लॉन्च किया, जिसमें वह रूस की प्राचीन और शक्तिशाली लोकनृत्य शैलियों को एक्सप्लोर करती नजर आईं। लॉन्च इवेंट में उनके दोस्तों, परिवार और इंडस्ट्री के लोगों ने इस अनोखे विज़न की सराहना की।
शक्ति मोहन के मुताबिक यह प्रोजेक्ट उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हजारों साल पुरानी नृत्य शैलियों को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ना है, ताकि ये कला रूप जीवित रह सकें। पहले सीजन में वह कई देशों के पारंपरिक नृत्य रूप सीख चुकी हैं और उन्हें अपने दर्शकों तक पहुंचाया है। उनका मानना है कि दुनिया में अनगिनत नृत्य परंपराएं ऐसी हैं जो अपनी सुंदरता के बावजूद धीरे-धीरे गुमनाम होती जा रही हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि इन नृत्य शैलियों को आधुनिक मंच और नए अंदाज़ में पेश किया जाए, ताकि युवा उनमें रुचि ले सकें। रूस के लोकनृत्य के अनुभव को उन्होंने अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभव बताया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य विशेषकर भरतनाट्यम से गहरी जुड़ाव रखने वाली शक्ति के लिए रूसी नृत्य बिल्कुल अलग दुनिया था, जिसमें तेज गति, अनोखी तकनीक और चेहरे की भाव-भंगिमाओं का खास महत्व है।
इन दोनों शैलियों के बीच का अंतर उनके लिए सीखने की प्रक्रिया को और भी रोचक बनाता है। यात्रा के दौरान उन्हें रूसी संस्कृति की गर्मजोशी ने भी प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि एक स्थानीय कोरियोग्राफर उनके समर्पण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें रूसी परंपरा का विशेष हेडगियर भेंट में दिया। उनके लिए यह तोहफा सिर्फ यादगार वस्तु नहीं, बल्कि दो अलग संस्कृतियों के बीच बने सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक है। शक्ति मोहन का यह वैश्विक नृत्य सफर साबित करता है कि कला की कोई सीमा नहीं होती।
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