भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक हुई पूजा, अमन-चैन के बीच नमाज भी हो गई अदा
हो पाई। तय संख्या में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने नमाज पढ़ी और भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की पूजा और हवन जारी रहा। पूर्णाहूति के बाद हवन पूर्ण हुआ और धारवासियों ने चैन की सांस ली।
आस्था और इबादत की दोनों धाराएं शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच एक जगह और एक समय पर मिलीं, लेकिन इस बार विवाद नहीं हुआ। न पत्थर चले और न ही आंसू गैस के गोले छोड़े गए। बीते वर्षों में जब भी वसंत पंचमी शुक्रवार को आई थी, धार के हालात बिगड़े थे, लेकिन इस बाद प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी और धार के लोगों ने भी धीरज धरा। वसंत पंचमी और जुम्मे की नमाज निर्विघ्न तरीके से सम्पन्न हुई। भोज उत्सव समिति ने धर्मसभा भी आयोजित की। जिसमें वर्ष 2034 तक धार में भव्य मंदिर बनाने की बात कही गई।
पुलिस सुरक्षा में नमाज के लिए आए मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि
शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और नमाज कराना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने राह आसान कर दी। भोजशाला की मस्जिद में दोपहर 2 बजे नमाज भी अदा कराई गई। वज्र वाहन में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को सुरक्षा के साथ लाया गया। 20 मिनट तक नमाज अदा होने के बाद समाजजनों को वापस ले जाया गया। 15 से अधिक संख्या में मुस्लिम समाज के लोग आए थे। इसके लिए प्रशासन ने पास भी जारी किए।
चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात
वसंत पंचमी पर धार शहर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। भोजशाला जाने वाले हर रास्ते पर पुलिस का पहरा था और बैरिकेड लगाए गए थे। आसमान पर ड्रोन मंडरा रहे थे। घरों की छतों से लेकर गलियों तक कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
हजारों लोगों ने किए निर्विघ्न दर्शन
धार में जब-जब शुक्रवार और वसंत पंचमी का मिलन हुआ, धार में तनाव और संघर्ष ने भी दस्तक दी, इसीलिए प्रशासन ने सुरक्षा में कोई कसर बाकी नहीं रखी। भोजशाला के बाहर आरपीएफ के जवान तैनात थे तो भोजशाला के भीतर दो हजार से ज्यादा जवान फैले हुए थे। जमीन से लेकर आसमान तक भोजशाला परिसर की निगरानी हो रही थी और इन सबके बीच हजारों की संख्या में लोगों ने भोजशाला के दर्शन किए।
छावनी बना रहा धार
शहर की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने दस हजार पुलिस जवानों को तैनात किया था, जिससे धार एक पुलिस छावनी जैसा नजर आने लगा था। भोजशाला परिसर को छह अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी की गई थी और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी थी।
झलकियां
भोजशाला में बड़ी संख्या में महिलाएं भी आईं। उनके साथ छोटे बच्चे भी साथ रहे। सभी नंगे पैर दर्शन के लिए पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर भी भोजशाला में दर्शन के लिए आईं। भोजशाला में मां सरस्वती का तैलय चित्र रखा गया, जिसकी पूजा की गई।
भोजशाला में आने वाले भक्तों के लिए धार के सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने भोजन के स्टॉल लगाए। जहां पूड़ी आलू की सब्जी, पोहे, चाय दर्शन करने आ रहे भक्तों को दी गई।
शोभा यात्रा भोजशाल पहुंची। बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष भगवा पताकाओं के साथ आए। युवक नारे लगा रहे थे। खाली कर दो रास्ते, भोजशाला के वास्ते। शोभायात्रा में डीजे गाड़ियां भी थीं।
भोजशाला की मस्जिद वाले हिस्से को अफसरों ने टेंट से ढकवा दिया था। इसके अलावा भोजशाला की छत के एक हिस्से पर भी सफेद टेंट लगाया गया था।
दोपहर ढाई बजे के बाद भोजशाला में कतार लगना बंद हो गई। आसानी से सभी को प्रवेश मिल रहा था।
भोजशाला में लोग नंगे पैर दर्शन के लिए गए। भोजशाला के बाहर जूते चप्पलों का ढेर लग गया।
इधर एक पक्ष ने आरोप भी लगाए कि उन्होंने कोई नमाज नहीं पढी है। दावा है कि डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी ने उन्हें और उनके साथियों को पिछले 16 घंटे से कमाल मौला मस्जिद में रोककर रखा। लेकिन दोपहर 2 बजे तक उनसे नमाज नहीं पढ़वाई गई।
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