रोबोटिक्स बनाम मानवीय संवेदना: लग्जरी होटल के अनुभव ने सिखाया ऑटोमेशन का नया सबक
टोक्यो। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में लगभग 4 करोड़ सर्विस रोबोट्स विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। फैक्ट्रियों से लेकर अस्पतालों, मॉल्स और रेस्टोरेंट्स तक, रोबोट्स इंसानों के कठिन कार्यों को सुगम बना रहे हैं। हालाँकि, जापान के एक लग्जरी होटल में रोबोट्स के उपयोग को लेकर हुए हालिया प्रयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑटोमेशन की अपनी सीमाएं हैं और यह मानवीय भावनाओं व रचनात्मकता का स्थान नहीं ले सकता।
जापान के इस अनूठे होटल ने शुरुआत में रिसेप्शन पर डायनासोर जैसे रोबोट्स तैनात किए थे, जो मेहमानों का स्वागत करते थे। चेक-इन से लेकर सामान को कमरे तक पहुँचाने तक की पूरी प्रक्रिया रोबोटिक पोर्टर और सिस्टम के हवाले थी। शुरुआत में यह तकनीक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और होटल की बुकिंग में उछाल देखा गया। लेकिन कुछ ही समय बाद तकनीकी खामियां उभरने लगीं। रोबोट्स ग्राहकों की अलग-अलग भाषाओं और विशिष्ट मांगों को समझने में विफल रहे। सामान पहुँचाने के दौरान बाधाएं आईं और सामान्य कस्टमर सर्विस में रोबोट्स पूरी तरह असमर्थ साबित हुए। नतीजतन, नियमित रखरखाव की भारी लागत और तकनीकी विफलताओं के कारण होटल प्रबंधन को चार साल के भीतर लगभग 243 रोबोट्स को काम से हटाना पड़ा।
इस विफलता ने वैश्विक स्तर पर ऑटोमेशन को लेकर छह महत्वपूर्ण सबक दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह ऑटोमेशन पर निर्भर रहने के बजाय रोबोट्स का सीमित और चुनिंदा उपयोग ही बुद्धिमानी है। सर्विस रोबोट्स मनोरंजन और आकर्षण के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन जटिल समस्याओं के समाधान में वे इंसानों के मुकाबले कमजोर हैं। दूसरा बड़ा सबक यह है कि कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में सहानुभूति, रचनात्मकता और व्यक्तिगत संपर्क अनिवार्य है, जिसे एक मशीन कभी पूरा नहीं कर सकती। इसके अतिरिक्त, रोबोट्स का रखरखाव महंगा है और सुरक्षा के लिहाज से उन पर पूर्ण भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में इस समय 40 लाख फैक्ट्री रोबोट्स और 3.6 करोड़ सर्विस रोबोट्स कार्यरत हैं। चीन, जापान, अमेरिका, कोरिया और जर्मनी इस बाजार के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। जहाँ फैक्ट्री रोबोट्स खतरनाक और भारी कार्यों में सफल रहे हैं, वहीं सर्विस रोबोट्स का उपयोग कोविड संकट के बाद सफाई और सैनिटाइजेशन में बढ़ा है। चीन में रोबोट शेफ और डिलीवरी रोबोट्स का चलन है, तो जर्मनी में ये भारी प्लेटें उठाने का काम करते हैं ताकि मानव कर्मचारी ग्राहक सेवा पर ध्यान दे सकें। कुल मिलाकर, जापान के इस अनुभव ने दुनिया को यह समझा दिया है कि रोबोट्स इंसानों के सहायक तो बन सकते हैं, लेकिन वे इंसानों का विकल्प नहीं हैं। ऑटोमेशन का संतुलित और समझदारी भरा इस्तेमाल ही भविष्य की सबसे प्रभावी रणनीति होगी।
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