Pradosh Vrat 2026: माघ प्रदोष व्रत पर बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें तिथि व पूजा विधि
Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का महत्व सबसे अधिक होता है. हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को यह व्रत रखा जाता है. माघ माह में आने वाले प्रदोष व्रत को माघ मास प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से अच्छे फल और लाभ की प्राप्ति होती है. इस बार प्रदोष व्रत के दिन ऐसा शुभ संयोग बनने जा रहा है कि यह तिथि बेहद खास रहने वाली है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि के दौरान शिवजी बहुत ही उदार होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनाते हैं. तो आइए जानते हैं कि माघ महीने में आने वाला प्रदोश व्रत कब है और शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या रहने वाली है.
कब है प्रदोष व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की त्रयोदशी तिथि के प्रारंभ होने पर 15 जनवरी, गुरुवार को रात 8 बजकर 18 मिनट से प्रदोष व्रत शुरू होने वाला है और इसका समापन अगले दिन यानी 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि और प्रदोष काल की गणना के मुताबिक माघ महीने का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा. वहीं, रात के समय प्रदोष व्रत के समापन के बाद चतुर्दशी तिथि की शुरूआत हो जाएगी. इसके चलते प्रदोष व्रत के दिन ही मासिक शिवरात्रि का शुभ संयोग भी बनता नजर आ रहा है. प्रदोष काल में लोग भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं. इससे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य के दरवाजे भी खुल जाते हैं.
प्रदोष व्रत के दिन शुभ मुहूर्त
माघ महीने में आने वाला प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है. प्रदोष व्रत में सबसे अच्छा और शुभ मुहूर्त प्रदोष काल का रहेगा. 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत में पूजा करने का प्रदोष काल शाम 5 बजकर 1 मिनट से लेकर 6 बजकर 31 मिनट तक रहने वाला है. इस अवधि के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है. पंचांग के हिसाब से सूयोस्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूयोस्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल कहा जाता है.
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन व्रत करने वालों को सुबह जल्दी उठकर स्न्नानादि करना चाहिए. इसके बाद साफ कपड़े पहनना चाहिए.
घर के मंदिर में एक जगह लकड़ी की चौकी बनाए. चौकी पर वस्त्र बिछाएं इसके बाद भगवान शिव और पार्वती की तस्वीर को स्थापित करें. इसके साथ ही उस स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें.
घर के मंदिर और शिवालय में जाकर व्रत वाले व्यक्ति को भगवान को बेलपत्र, गंगाजल, दही, शहद, दुध आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें.
शिवजी को चंदन, फूल, नैवेद्य, दीप-धूप, अक्षत आदि आर्पित करें. इसके बाद, विधि-विधान के साथ पूजा और आरती करें.
शाम के समय प्रदोष काल में स्वच्छ हाेकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और फिर, ‘ओम नम: शिवाय’ या फिर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
शिवजी और मां पार्वती की पूजा आरती करने के बाद भगवान को भोग लगाए.
अमेरिकी सीनेट में H-1B को लेकर नया बिल, क्या भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की बढ़ेंगी मुश्किलें?
टी20 मुकाबले से पहले टीम इंडिया का डिप्लोमैटिक स्टॉप, इंडिया हाउस में भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात
नितेश तिवारी की 'रामायण' पर दीपिका चिखलिया का रिएक्शन, साई पल्लवी को लेकर तोड़ी चुप्पी
'बदला हुआ कश्मीर दुनिया को दिखाइए', उमर अब्दुल्ला की अपील पर इम्तियाज अली का बड़ा बयान
विराट-हेड विवाद पर आया बड़ा बयान, पत्नी को मिली गालियों पर बोले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज
ऑटो चालक पर जानलेवा हमला, CCTV के सहारे आरोपियों तक पहुंचने में जुटी पुलिस
मॉनसून की मार से रेल यातायात प्रभावित, गुजरात में कई गाड़ियां देरी से चल रहीं
पेपर लीक विवाद के बीच राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा
सावन शुरू होने से पहले अंडों के दाम आसमान पर, रिटेल बाजार में बढ़ी कीमत