मौसम का मिजाज: उत्तर भारत में कंपाने वाली ठंड और दक्षिण-पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अलर्ट
नई दिल्ली। दक्षिण भारत में मानसून की विदाई के बावजूद बारिश का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। केरल में आने वाले 72 घंटों के दौरान कई जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और हवाओं की रफ्तार बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है। तमिलनाडु में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। चेन्नई समेत कई तटीय इलाकों में घने बादल छाए रहेंगे और झमाझम बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा पुडुचेरी और कराईकल जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने के कारण एक तरफ जहां उत्तर भारत के मैदानी इलाके भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं, वहीं दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, विभिन्न मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू होने वाला है।
पहाड़ी राज्यों में भी मौसम का असर काफी गहरा रहने वाला है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी की आशंका है, जबकि निचले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस बर्फबारी और बारिश के कारण पहाड़ों से सटे मैदानी इलाकों में तापमान और नीचे गिरेगा, जिससे ठंड का प्रकोप और अधिक बढ़ जाएगा। सड़कों पर फिसलन और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। दक्षिण के अन्य हिस्सों जैसे तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी अगले तीन दिनों तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और जोरदार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है, वहीं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी भारी बारिश को लेकर चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके।
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