2 या 3 जनवरी? कब रखा जाएगा पौष पूर्णिमा का व्रत? सुख-समृद्धि का खास उपाय
हिंदू धर्म शास्त्रों में पौष मास को दान, तप और पुण्य अर्जित करने का विशेष समय माना गया है. इस महीने की पूर्णिमा तिथि को अत्यंत फलदायी और शुभ बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है. पौष पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से भाग्य को संवारने और आर्थिक स्थिति को उत्तम करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है. इस वर्ष पौष पूर्णिमा शुभ योगों के साथ पड़ रही है, जिससे इस दिन किए गए दान और धार्मिक कर्म कई गुना फल देने वाले माने जा रहे हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा न केवल धन-समृद्धि बढ़ाने में सहायक होती है बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति भी प्रदान करती है. नए वर्ष 2026 में यह तिथि विशेष महत्व रखती है. आइए जानते हैं, उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज से कि नए साल में पौष पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इस पावन तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है.
कब मनाई जाएगी पौष पूर्णिमा?
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार पंचांग के मुताबिक पौष पूर्णिमा तिथि दो जनवरी को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन तीन जनवरी को दोपहर तीन बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में पौष पूर्णिमा तीन जनवरी को मनाई जाएगी.
पौष पूर्णिमा पर जरूर करें ये काम
पौष पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है. इस तिथि पर व्रत, पूजा और दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और मन को शांति मिलती है. इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा करने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है. साथ ही व्रत रखकर चंद्रदेव की आराधना करने से कुंडली से संबंधित चंद्र दोष भी शांत होता है. इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल, भोजन सामग्री या अपनी सामर्थ्य अनुसार धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
पौष पूर्णिमा पर भूल से भी न करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा का दिन अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है. इस शुभ तिथि पर कुछ कार्यों से परहेज करना आवश्यक होता है ताकि देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो. इसमें पौष पूर्णिमा के दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. सात्विक भोजन ग्रहण करने से मन और वातावरण शुद्ध रहता है. पूर्णिमा की तिथि विशेष ऊर्जा से युक्त मानी जाती है. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और ईश्वर का स्मरण और ध्यान अवश्य करें. इस दिन विशेषकर बुजुर्गों और जरूरतमंदों का अपमान न करें. वाणी में मधुरता रखें और क्रोध करने से बचें अन्यथा धन की देवी रुष्ट हो सकती हैं. साथ ही इस दिन कर्ज लेना या देना उचित नहीं माना जाता. ऐसा करने से आर्थिक असंतुलन और धन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इन नियमों का पालन करके पौष पूर्णिमा के पुण्य फल को कई गुना बढ़ाया जा सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है.
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