पति जिंदा, फिर भी विधवा पेंशन ले रहीं थीं 25 महिलाएं , बरेली में बड़ा घोटाला उजागर
उत्तर प्रदेश | उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में महिला कल्याण विभाग में हुए विधवा पेंशन घोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं. बृहस्पतिवार को एसडीएम द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई और इसमें आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को भेज दिया. इसके बाद शुक्रवार को एसएसपी ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाकर 25 मामलों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. पुलिस अब गलत तरीके से पेंशन पाने वाली महिलाओं की पहचान करने के साथ-साथ उन बिचौलियों और सत्यापन करने वाले कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिनकी सांठगांठ से यह फर्जीवाड़ा संभव हुआ|
विधवा पेंशन घोटाले की विस्तृत जांच के लिए बनाई गई. एसआईटी का नेतृत्व एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा कर रही हैं. उनके साथ सीओ आंवला नितिन कुमार और आंवला थाना प्रभारी केवी सिंह को भी टीम में शामिल किया गया है. एसडीएम आंवला ने इस मामले की लगभग पांच महीने गहन जांच की थी. पिछले सप्ताह उन्होंने डीएम को रिपोर्ट सौंपी थी|
रिपोर्ट में कई बिंदुओं को अधूरा मानते हुए जिलाधिकारी ने इसे पुलिस को भेज दिया. रिपोर्ट में कुल 25 मामले ऐसे बताए गए हैं जिनमें महिलाओं ने अपने आप को विधवा बताकर पेंशन हासिल की, जबकि वे विवाहित सुहागिन थीं. पुलिस इन सभी महिलाओं के कागजात, बैंक खातों और प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है. ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसकी गलती थी|
पहले में सामने आया था पेंशन घोटाला
यह पहली बार नहीं है, जब बरेली में इस तरह का पेंशन फर्जीवाड़ा सामने आया है. वर्ष 2023 में भी सुहागिन महिलाओं द्वारा विधवा पेंशन लेने का खुलासा हुआ था. उस समय जांच में 34 महिलाओं को गलत तरीके से पेंशन प्राप्त करते पाया गया था. इतना ही नहीं, पिछले साल चार नवंबर को पुलिस ने एक और बड़ा मामला पकड़ा था, जिसमें 56 सुहागिन महिलाओं को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेने की पुष्टि हुई थी. इनके खातों में कुल 1.23 करोड़ रुपये की पेंशन भेजे जाने का पता चला था. यह खुलासा भी एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा की टीम ने ही किया था|
इन लगातार खुलासों से प्रशासन की नींद उड़ गई थी. मई से जो जांच धीमी गति से चल रही थी, उसे फिर तेज कर दिया गया. इसी वजह से हाल ही में एसडीएम ने विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी|
कई अधिकारियों पर संदेह
एसडीएम की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान कई मामलों में सत्यापन करने वाले कर्मचारियों के नाम और जिम्मेदारी साफ नहीं मिल सकी. एसडीएम ने इस संबंध में ब्लॉक विकास अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन किसी विभाग ने सही से सहयोग नहीं किया. कई महिलाओं के पति के नाम से जुड़े मृत्यु प्रमाणपत्र भी संदिग्ध पाए गए. माना जा रहा है कि बिचौलियों ने ही इन प्रमाणपत्रों को बनवाने में भूमिका निभाई थी. रिपोर्ट में कुछ बिचौलियों का जिक्र भी किया गया है जिन पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है|
एसएसपी अनुराग कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में 25 मामलों में अनियमितताओं का जिक्र है. इन सभी पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं|
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