इंदौर बायपास बना परेशानी का पास, टोल टैक्स पर गरमाई बहस
छह सौ किलोमीटर लंबे आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग में सबसे खराब हालत राऊ से देवास तक के हिस्से की है। इसके लिए वाहन चालकों को टोल टैक्स चुकाना पड़ रहा है, लेकिन बदले में अच्छी सड़क नहीं बल्कि ट्रैफिक जाम और गड्ढे मिलते है। इंदौर से भोपाल जाने वाले कई लोगों तो अर्जुन बड़ौद में जाम की स्थिति देखकर भोपाल जाने की प्लानिंग कर रहे है, लेकिन जिन्हें मुंबई, नासिक, मालेगांव से इंदौर होते हुए भोपाल, ग्वालियर या आगरा जाना है, उन्हें इन परेशानियों से होकर गुजरना पड़ रहा है।
वर्ष 2002 में देवास इंदौर राऊ बायपास को फोरलेन बनाया गया था। आठ साल बाद अचानक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसे छह लेन करने की घोषणा की, जबकि किसी ने इसकी मांग नहीं की थी। छह लेन बनाने के साथ 25 साल के लिए इस इस मार्ग पर टोल टैक्स भी लगा दिया गया। इंदौर से बायपास को जोड़ने वाली एक अन्य सड़क पर भी टोल नाका बनाया गया, यानि एक सड़क के लिए दो तरफ से वाहन चालकों को टोल टैक्स चुकाना पड़ता है।
50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक अलग-अलग श्रेणी के वाहनों से हर दिन 15 लाख से ज्यादा टोल टैक्स कंपनी लेती है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर खराब सड़क ही मिल रही है। छह लेन निर्माण के समय न तो पूरी सर्विस रोड बनी और न ही इंदौर के एंट्री पाइंट पर ज्यादा ब्रिज बनाए गए। अब उस गलती को सुधारा जा रहा है और 35 किलोमीटर के हिस्से में तीन ब्रिजों का निर्माण एक साथ शुरू कर दिया गया। इस कारण ट्रैफिक सर्विस रोड पर शिफ्ट किया गया है और वाहनों को गड्ढों के बीच से गुजरना पड़ रहा है। एक-डेढ़ फीट के गड्ढे वाहनों की रफ्तार धीमी कर रहे है। इस कारण सुबह से लेकर शाम तक ट्रैफिक जाम भी लग रहा है।
अफसरों के साथ बैठक की
बायपास पर फैली व्यवस्था को लेकर मैने दो मर्तबा अफसरों के साथ बैठक की है। उन्हें कहा गया है कि ब्रिजों का निर्माण जल्दी किया जाए। जिस हिस्से में ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। उसे भी चौड़ा किए जाए। इससे यातायात बार-बार बाधित नहीं होगा।
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