नवरात्रि में नहीं सोतीं उज्जैन की ये देवी, 9 रात नहीं होती शयन आरती, राजा विक्रामादित्य को बनाया था सम्राट!
देशभर में नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो गया है. महाकाल की नगरी उज्जैन में भी यह पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. इसी कड़ी में उज्जैन का प्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर भी भक्तों से खचाखच भरा हुआ है. शास्त्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है. मान्यता है कि यहीं से राजा विक्रमादित्य सम्राट बने थे. यही कारण है कि यह मंदिर तंत्र क्रिया और सिद्धि साधना का भी विशेष केंद्र है.
जानकारों के अनुसार, जब माता सती के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, तब उनकी दाहिनी कोहनी उज्जैन की शिप्रा नदी किनारे गिरी थी. तभी से भगवान शिव ने यहां शक्तिपीठ की स्थापना की और यह स्थान हरसिद्धि माता के नाम से प्रसिद्ध हुआ. मंदिर के समीप ही लगभग 200 मीटर की दूरी पर भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग महाकाल रूप में विराजमान है. यहां माता हरसिद्धि की प्रतिमा के बीच देवी महालक्ष्मी और महासरस्वती विराजित हैं. साथ ही यहां यंत्र भी प्रतिष्ठित है, जिसके कारण यह स्थान तांत्रिक परंपरा में सिद्धपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है.
श्री यंत्र की सिद्धि मिली…
हरसिद्धि मंदिर का संबंध राजा विक्रमादित्य से भी जुड़ा हुआ है. स्कंद पुराण में उल्लेख है कि देवी ने प्रचंड राक्षस नामक दैत्य का वध किया था, तभी से वह हरसिद्धि नाम से जानी गईं. लोक परंपरा के अनुसार माता हरसिद्धि विक्रमादित्य की कुलदेवी भी थीं. कहते हैं कि विक्रमादित्य ने यहां देवी को प्रसन्न किया और यहीं से उन्हें श्री यंत्र की सिद्धि प्राप्त हुई. इसी बल पर उन्होंने पूरे देश पर शासन किया और न्यायप्रिय राजा कहलाए.
51 फीट ऊंचा दीप स्तंभ
मंदिर परिसर में स्थापित 51 फीट ऊंचे दीप स्तंभ भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. इनमें एक बार में 1100 दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जिसके लिए 60 लीटर तेल और करीब 4 किलो रुई की आवश्यकता होती है. भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर दीपमाला प्रज्वलित कराते हैं. खास बात यह है कि दीप जलाने के लिए कई बार लंबी वेटिंग भी लग जाती है.
9 माता शयन नहीं करतीं…
नवरात्रि के नौ दिनों में हरसिद्धि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. माता को अनार के दाने, शहद और अदरक का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि इन नौ दिनों में माता शयन नहीं करतीं, इसलिए इस अवधि में शयन आरती नहीं होती. नवरात्रि का पर्व यहां भक्तों के लिए आस्था और दिव्यता का अद्भुत संगम बन जाता है.
विजय थलापति के बाद अब धनुष? वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
शिवकुमार के बयान पर बीजेपी आक्रामक, पेपर लीक मुद्दे पर शुरू हुआ नया विवाद
रिलीज से पहले बदला प्लान, पंकज त्रिपाठी की फिल्म पर निर्देशक अमित राय का बड़ा बयान
मूंग खरीदी को लेकर छिड़ा लेटर वॉर, केंद्र-एमपी सरकार के बीच बढ़ी तकरार
शताब्दीपुरम में अतिक्रमण हटाने पहुंचा JDA, विधायक के आने से मचा हंगामा; अध्यक्ष ने दिया बयान
4 वरिष्ठ IFS अधिकारियों के रिटायरमेंट से वन विभाग में बढ़ेगी अधिकारियों की कमी
संसद में एंटी पेपर लीक बिल के बीच राहुल गांधी का वार, मोदी सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
जिम्बाब्वे में जीत के बाद अब नई चुनौती, जानिए दिसंबर तक टीम इंडिया का पूरा शेड्यूल
रामगढ़ ताल में बोट हादसे से सनसनी, दो नावों की टक्कर में एक पर्यटक की मौत