रूस से तेल खरीद राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी - भारत
नई दिल्ली: रूस के उप-प्रधानमंत्री और पुतिन के करीबी सहयोगी दिमित्री पात्रुशेव सितंबर 2025 में भारत दौरे पर आ सकते हैं। उनकी यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत से झींगा आयात बढ़ाना और उर्वरक आपूर्ति पर चर्चा करना होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% टैरिफ लगाने से भारतीय झींगा निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
रूस बनेगा नया बाजार
भारत अमेरिका को झींगे का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, लेकिन टैरिफ के बाद भारतीय निर्यातकों को इक्वाडोर, इंडोनेशिया, वियतनाम और चीन जैसी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ रही है। ऐसे में रूस का बाजार भारतीय झींगा उद्योग के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।
यात्रा का एजेंडा
पात्रुशेव नई दिल्ली में शीर्ष भारतीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर जोर देंगे। उनका मानना है कि कृषि और खाद्य क्षेत्र में भारत-रूस साझेदारी दोनों देशों को आर्थिक मजबूती देगी।
अमेरिका का दबाव
ट्रंप प्रशासन भारत पर लगातार दबाव बना रहा है। झींगा निर्यात पर 58% तक का संयुक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। हाल ही में G-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिका ने सहयोगी देशों से भारत और चीन के खिलाफ भी टैरिफ बढ़ाने की मांग की।
भारत का रुख
अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर पुतिन के युद्ध को फंडिंग कर रहा है। हालांकि भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी नीति राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार की स्थिरता पर आधारित है।
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