खतरे में रामगढ़ पहाड़ी: BJP की जांच समिति पर तेज हुई सियासत
रामगढ़। सरगुजा जिले के रामगढ़ में स्थित प्राचीन पहाड़ कोल माइंस में होने वाले ब्लास्टिंग की वजह से अब खतरे में दिखाई दे रहा है। जगह-जगह लैंड स्लाइडिंग की घटना हो रही है, तो वन विभाग ने भी पहाड़ के पत्थरों में चेतावनी वाले संदेश लिखे हैं, तो दूसरी तरफ पिछले दिनों पूर्व उप मुख्यमंत्री TS सिंहदेव ने भी इस पर सवाल उठाया था और पहाड़ को बचाने के लिए संरक्षण और संवर्धन करने की मांग की थी।
खतरे में रामगढ़ पहाड़ी, BJP ने बनाई जांच समिति
इसके बाद अब इसे लेकर राजनीति शुरू हो गई है। BJP ने पहाड़ को ब्लास्टिंग की वजह से होने वाले नुकसान की हकीकत जानने के लिए एक तीन सदस्यों वाली समिति का गठन किया है, समिति में पूर्व विधायक शिव रतन शर्मा, विधायक रेणुका सिंह, भाजपा महामंत्री अखिलेश सोनी शामिल हैं जिन्हे सात दिन में जांच रिपोर्ट देना है लेकिन इस समिति के गठन के बाद पहाड़ को लेकर राजनीति तेज हो गई है।
पूर्व डिप्टी CM के भतीजे ने खड़ा किया सवाल
भाजपा के द्वारा जांच समिति बनाये जाने पर पूर्व उप मुख्यमंत्री TS सिंहदेव के भतीजे और रामगढ पर्वत संरक्षण एवं संवर्धन समिति के सदस्य आदित्येश्वर शरण सिंहदेव का बयान सामने आया है। आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जांच समिति बनाई है, उसके पहले लाइन में ही लिखा हुआ है कि राजनीतिक दल के द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है जबकि किसी राजनीतिक दल ने पहाड़ के संरक्षण को लेकर बात नहीं की है और न ही किसी ने कोई भ्रम फैलाया है। टी एस बाबा ने भी गैर राजनीतिक मंच से अपनी बात कही थी और उन्होंने अपनी बात रखने के दौरान भी इसे स्पष्ट किया था कि वह गैर राजनीतिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं लेकिन इसके बाद भी भाजपा इसे राजनीतिक भ्रम बता रही है जो गलत है। उनका कहना है कि स्थानीय लोग खुद बता रहे हैं कि किस तरह ब्लास्टिंग की वजह से रामगढ़ पहाड़ हिलता है और इसकी वजह से पहाड़ के पत्थर टूट कर गिर रहे हैं और लैंड स्लाइडिंग की घटना हो रही है।आदितेश्वर शरण सिंहदेव ने कहा है कि पहाड़ के संरक्षण में राजनीति नहीं होना चाहिए और भारतीय जनता पार्टी ने जो जांच समिति बनाई है वह भी पहाड़ के संरक्षण के हित में जांच रिपोर्ट तैयार करेगी ऐसी उम्मीद है। वहीं उन्होंने यह भी कहा है कि 2022 में विधानसभा में सर्वसहमति से प्रस्ताव पास किया गया था कि हसदेव क्षेत्र में अब कोई दूसरा कोल माइंस नहीं खोला जाएगा, यह प्रस्ताव भाजपा के विधायक धर्मजीत सिंह के द्वारा लाया गया था तब सभी विधायकों ने इसका समर्थन किया था और सर्व सहमति से प्रस्ताव पास किया गया था, उसके बाद भी कोयला खदान खोलने की तैयारी की जा रही है, ऐसे हाल में इस विधानसभा के प्रस्ताव का भी ध्यान रखा जाना चाहिए और पहाड़ को बचाने की दृष्टि से सभी को काम करना चाहिए।
जांच समिति में एक्सपर्ट शामिल करने लोग कर रहे मांग
दूसरी तरफ जांच समिति बनाए जाने के बाद लोग सोशल मीडिया पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जांच समिति में ऐसे लोगों को क्यों नहीं रखा जाना चाहिए जो ब्लास्टिंग से होने वाले नुकसान, पहाड़ के इतिहास और पहाड़, भूगर्भ के विशेषज्ञ हों. अंबिकापुर के सीनियर डॉक्टर और समाजसेवी योगेंद्र सिंह गहरवार ने सोशल मीडिया में लिखा है, इसमें निष्पक्ष एक्सपर्ट से जांच करवाने की आवश्यकता है।कुछ सदस्य समाज से भी जाते तो अच्छा रहता, कुछ जियोलॉजिस्ट भी होने चाहिए इस टीम में जांच का अर्थ तभी है जब जांच कमेटी पर पूर्ण विश्वास किया जा सके। जिन लोगों ने विरोध किया है और आम जन मानस की आशंका इस कमेटी से खत्म नहीं होगी। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने लिखा है कि रामगढ़ के मामले मे निष्पक्ष वरिष्ठ भू खनन विशेषज्ञ व विस्फोटक विशेषज्ञ होगे तो वे ही क्षेत्र का सर्वे कर सही राय दे सकते हैं, इन लोगों के बिना सभी कमेटी अधूरी है। एसईसीएल महान- 2 कोयला खदान में विस्फोट की वजह से प्राचीन बिलद्वार गुफा कुछ वर्ष पहले ढह गया था, इस बात को भी याद रखना होगा।
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