जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्राध्यापकों को मिले 7वां वेतनमान
जबलपुर। मप्र जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा है कि अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को भी सातवें वेतन आयोग का लाभ प्रदान किया जाए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 31 मार्च 2000 के पहले नियुक्त प्राध्यापकों को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन व अन्य लाभ प्रदान किए जाएं।
जबलपुर निवासी मप्र अशासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी व डॉ. शैलेश जैन की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने 27 फरवरी 2024 को अशासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ देने से इनकार कर दिया है।
सातवें वेतनमान की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने 18 जनवरी 2019 को परिपत्र जारी कर शासकीय महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ देने के आदेश जारी किए थे। इसके खिलाफ पूर्व में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। उस याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अशासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ देने के आदेश जारी किए थे। सरकार द्वारा उक्त आदेश का पालन नहीं किए जाने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद सरकार ने उक्त आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। अपील खारिज होने के बावजूद सरकार द्वारा आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण यह याचिका दायर की गई।
याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने आदेश जारी किए। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि आगामी चार माह के भीतर याचिकाकर्ताओं को 25 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया जाए। साथ ही न्यायालय ने कहा है कि सेवानिवृत्त प्राध्यापकों को शेष एरियर का भुगतान आगामी 9 माह के भीतर किया जाए। इसके अलावा जो प्राध्यापक अभी सेवा में हैं, उन्हें आगामी 12 माह के भीतर शेष एरियर का भुगतान करना होगा। एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि उक्त समयावधि में भुगतान नहीं होने की स्थिति में 6 प्रतिशत ब्याज का भुगतान भी करना होगा।
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