क्या धरती पर आने वाली है आपदा? उज्जैन महाकाल मंदिर से मिला बड़ा संकेत, पुजारी ने बताया शिवजी का इशारा
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में करोड़ो लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां मंदिर को लेकर सैकड़ो मान्यता प्रचलित है, जो समय-समय पर देखने को मिलती है. नोतपा के दौरान भी मौसम में गर्मी नही ठंडी हवा के साथ आंधी-तूफान देखनें को मिला. इसी बीच, महाकाल मंदिर में एक अप्रत्याशित घटना हुई. तेज हवा के कारण महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर लगा सोने का ध्वज अचानक गिर गया, जिससे महाकाल के श्रद्धांलु तरह-तरह की बात सामने आ रही है.
दरअसल, यह पूरा मामला दो से तीन दिन पुराना बताया जा रहा है. इस घटना में अच्छी बात यह रही कि किसी को चोट नहीं आई. लेकिन, इस घटना ने मंदिर प्रशासन की सावधानी और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ध्वज को फिर से लगाने का काम शुरू हो गया है. वहीं, पुजारी मान रहे हैं कि ये अनिष्ट के भी संकेत होते हैं. हालांकि यहां भगवान स्वंय विराजमान हैं तो ऐसी संभावना कम है.
जानिए कब गिरा ध्वज?
दो-तीन दिन पहले तेज हवा चलने से उज्जैन मे कहीं जगह आंधी-तूफान देखने वाली स्थिति थी. हो सकता है जब यह ध्वज ढीला होगया होगा और नीचे गिर गया. यह ध्वज सालों से भक्ति और परंपरा का प्रतीक रहा है. दो-तीन दिन पहले तेज हवा चलने से यह ढीला हो गया और नीचे गिर गया. जब यह घटना हुई, तब मंदिर में सैकड़ों भक्त दर्शन के लिए मौजूद थे. मंदिर प्रशासन ने तुरंत उस जगह को खाली करा लिया और गिरे हुए ध्वज को सुरक्षित रख लिया.
महाकाल के आगे नहीं हो सकता अनिस्ट
मंदिर के पुजारि महेश शर्मा नें बताया कि यह घटना बहुत ही असामान्य है. यह धार्मिक रूप से चिंता का विषय है. परंपरा के अनुसार, गिरे हुए ध्वज को फिर से लगाया जाएगा. इसके लिए शिखर पर मचान बांधकर ध्वजा लगाने का काम चल रहा ह, लेकिन महाकाल स्वयंम मृत्यु को हरने वाले कहे गए है. उनके रहते कुछ अनिस्ट नहीं हो सकता है. इसलिए यह भन्ति ना रखें की कुछ गलत होने वाला है.
कालों के काल है भगवान महाकाल
मंदिर के पुजारी ने इस घटना पर अपना जवाब देते हुए स्पस्ट कर दिया वैसे, तो बाबा महाकाल कालों के काल हैं. वे खुद सभी प्रकार की विपत्तियां को दूर करने वाले हैं. परंतु शिखर का ध्वज गिरने की घटना को यदि अनिष्ट माना जा, तो इसके लिए सभी को भक्ति भाव पूजन पाठ व ध्यान करना चाहिए.
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