फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट क्यों है जरूरी? लापरवाही पर लग सकता है भारी जुर्माना!
छिंदवाड़ा: देश और प्रदेश में गर्मी के दिनों में अक्सर आग लगने की घटनाएं घटती रहती हैं. जिनकी वजह से लोगों को जान और माल की हानि होती है. आगजनी की घटनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में होती हैं. आगजनी की घटनाओं के पीछे कई कारण होते हैं. इनमें मुख्यतः लापरवाही, सुरक्षा उपायों में कमी के साथ जागरूकता भी बड़ा कारण है. इन कमियों के कारण अक्सर बिल्डिंग, भवन और ऑफिस में गलती से लगने वाली आग बड़े अग्निकांड में बदल जाती है. ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने फायर सेफ्टी एक्ट बनाया है.
अग्नि सुरक्षा मानदंडों का रखना होगा ध्यान
आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए अग्नि सुरक्षा मानदंडों का ध्यान रखना होता है. बिल्डिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, अस्पताल और मल्टीप्लेक्स सहित अन्य स्थानों पर एनबीसी (राष्ट्रीय भवन संहिता) 2016 के नियम अनुसार उपकरण लगवाकर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है, जिससे किसी भी प्रकार के जान माल और प्रॉपर्टी की हानि से बचा जा सके. अगर कोई संस्था या बिल्डिंग मलिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं लेता है तो प्रतिदिन 500 से 1000 रुपए तक जुर्माना भरना पड़ेगा.
क्या होता है फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट?
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट एक सुरक्षा प्रमाण पत्र होता है, जिसमें एनबीसी-2016 की गाइडलाइन के टेबल नंबर 7 मिनिमम रिक्वायरमेंट्स फॉर फायर फाइटिंग इंस्टॉलेशन के अनुसार फायर सुरक्षा उपकरण लगवाने के लिए फायर प्लान बनवाना होता है. यह मध्य प्रदेश सरकार से अधिकृत फायर कंसल्टेंट (फायर इंजीनियर) बनाते हैं. इसके लिए सबसे पहले फायर सेफ्टी प्लान के लिए अप्लाई करते हैं. इसके बाद सरकारी फायर ऑफिसर द्वारा फायर सेफ्टी प्लान पास किया जाता है. उस मुताबिक सभी फायर सेफ्टी इक्विपमेंट लगने के बाद अधिकृत कंसल्टेंट से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया जाता है. अधिकारियों की जांच के बाद 3 साल की समय सीमा के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी होता है.
यह होता है फायर सेफ्टी प्लान
नई या पुरानी बिल्डिंग जैसे अस्पताल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, हॉस्टल ,स्कूल, मल्टी बिल्डिंग में आग लगने की घटना से सुरक्षा के मद्देनजर फायर इंजीनियर बिल्डिंग की आवश्यकता अनुसार एनबीसी 2016 गाइडलाइन के अनुसार ड्राइंग तैयार करता है. इस फायर प्लान में विस्तृत रूप से सभी जानकारी फायर इंजीनियर द्वारा दी जाती है. अगर किसी प्रकार की आगजनी की घटना घटती है तो उससे सुरक्षा के लिए किन-किन उपकरणों की आवश्यकता है और वह किस स्थान पर लगेंगे. इससे संबंधित फायर प्लान का ड्राइंग तैयार किया जाता है, फिर इस ड्राइंग को सरकार द्वारा अधिकृत फायर इंजीनियर के द्वारा फायर सेफ्टी प्लान अप्रूवल के लिए अप्लाई किया जाता है, जब फायर प्लान अप्रूवल हो जाता है तब उसके मुताबिक वहां उपकरण लगाए जाते हैं.
फायर सेफ्टी ऑडिट हर साल करवाना होता है अनिवार्य
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद जारी दिनांक से हर एक साल बाद फायर सेफ्टी ऑडिट करवाना अनिवार्य होता है. फायर सेफ्टी ऑडिट अधिकृत फायर इंजीनियर द्वारा किया जाता है. इसमें फायर अधिकारी चेक करता है कि अग्नि सुरक्षा को लेकर लगाए गए उपकरण सुचारू रूप से चल रहे हैं या नहीं. उनकी वास्तविक स्थितियों क्या है? यदि कुछ कमियां हैं तो उन्हें बताया जाता है और उन कमियों को ठीक करने के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट में संपूर्ण डिटेल लिखकर जारी करता है.
लोगों को किया जा रहा जागरूक
सहायक अग्निशमन अधिकारी अभिषेक दुबे ने बताया कि "आगजनी की सुरक्षा को लेकर लगातार कई कार्यक्रम और नोटिस के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है." उन्होंने कहा कि "स्कूल, कॉलेज, मल्टीप्लेक्स, मॉल, संस्था या बिल्डिंग मलिक नोटिस जारी करने के 2 महीने के भीतर अधिकृत फायर कंसल्टेंट के माध्यम से फायर सेफ्टी प्लान अप्रूवल के लिए आवेदन नहीं डालते तो प्रतिदिन 500 रुपए के हिसाब से जुर्माना का प्रावधान है. वहीं एक साल के बाद यह प्रावधान 1000 रुपए प्रतिदिन का है."
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